कार्यक्रम में विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों व हितधारकों ने भाग लिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख राजकुमार पाठक ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित व सम्मानजनक बचपन सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समुदाय को मिलकर निरंतर प्रयास करना होगा.
विद्यालय से दूर होने पर बच्चों के शोषण की बढ़ जाती है आशंका
बीडीओ निशांत अंजुम ने कहा कि बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं का एक प्रमुख कारण बच्चों का शिक्षा से वंचित होना है. उन्होंने कहा कि जब बच्चे विद्यालय से दूर हो जाते हैं, तो उनके शोषण, तस्करी और बाल श्रम का शिकार बनने की आशंका बढ़ जाती है. बच्चों से जुड़े मामलों को संवेदनशील बताते हुए उन्होंने सभी विभागों से अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने की अपील की.
स्थायी समाधान के लिए व्यापक जागरूकता जरूरी
बाल संरक्षण विभाग के प्रखंड समन्वयक सुबोध कुमार ने कहा कि बाल श्रम, बाल विवाह और बाल तस्करी के स्थायी समाधान के लिए व्यापक जनजागरूकता जरूरी है. उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को किसी अपरिचित व्यक्ति के साथ ना भेजें, क्योंकि कई बार बच्चों को बहला-फुसलाकर तस्करी का शिकार बनाया जाता है.
कानूनी प्रावधान व श्रम विभाग के योजनाओं की दी गयी जानकारी
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बाल श्रम निषेध से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी. कार्यशाला में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और बाल तस्करी की रोकथाम से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी. कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बाल श्रम, बाल विवाह और बाल तस्करी के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक बचपन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया.
