श्री पांडेय ने कहा कि भगवान सूर्य इस अवधि में एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश नहीं करते. सौर चक्र में इस संक्रमण विहीन अवधि के कारण यह समय सांसारिक और भौतिक शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है. यह समय भगवान श्री विष्णु की उपासना दान, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जाता है. मलमास के दौरान जगह-जगह भागवत कथा अमृत का पान किया गया. वहीं, 15 जून को सोमवती अमावस्या के साथ अधिक मास की समाप्ति हुई. सोमवती अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं ने ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान किया. खासकर राजदहधाम स्थित उत्तर वाहिनी बराकर नदी में भक्तों ने श्रद्धा की डुबकी लगायी और काले तिल, जौ और कुश से पितरों को जल अर्पण किया. विवाहित महिलाओं ने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए पीपल के पेड़ की पूजा कर उसकी परिक्रमा की. वहीं, मलमास की समाप्ति के पश्चात पिछले तीस दिनों से रुके हुए सभी मांगलिक और शुभ कार्य शुरू मंगलवार से शुरू होंगे.
फिर से गूंजेगी शहनाई
वैवाहिक कार्यक्रम, गृह प्रवेश, गृह आरंभ, गुरु दीक्षा ग्रहण, उपनयन, मुंडन, देवता स्थापन, वाहन क्रय, गोदान, उद्यापन, कूप निर्माण भवन निर्माण समेत अन्य काम शुरू होंगे. मलमास समाप्त होते ही मांगलिक कार्यों के लिए सामानों की खरीदारी शुरू हो गयी. बाजार में चहल-पहल देखने को मिल रही है. वैवाहिक कार्यक्रम ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तिथि अर्थात 19 जून से लेकर 29 जून तक लगातार कुल 11 लग्न तथा आसान कृष्ण पक्ष में जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 तथा 12 को कुल सात लग्न है. जून और जुलाई मिलकर 12 शुभ लग्न हैं. इनमें जून में आठ और जुलाई में चार प्रमुख विवाह मुहूर्त विभिन्न पंचांगों के माध्यम से बताये जा रहे हैं. इसमें कई वर-वधू परिणय सूत्र में बंधेंगे. इसके पश्चात गुरु वृद्धत्वारंभ होगा. 26 जून के बाद से भगवान श्री विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे. इसमें फिर से विवाह और शुभ कार्यों पर विराम लगेगा. वैवाहिक लग्नाभाव हो जायेगा, अर्थात शहनाई की गूंज पर विराम लगेगी. अधिक मास की समाप्ति पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए विभिन्न प्रकार के मिष्टान्न का दान किया.
