यह कार्रवाई सदर अस्पताल प्रबंधन की ओर से की गयी शिकायत के बाद की जा रही है. मामले की जांच शुरू कर दी गयी है. आरोप है कि तीन मार्च 2006 को सदर अस्पताल में प्रधान लिपिक पद पर कार्यरत गणेश प्रसाद विश्वकर्मा ने स्टील बेड की मरम्मत और रंगाई के नाम पर फर्जी बिल बनाकर कोषागार से भुगतान करा लिया. उपाधीक्षक द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार 25 मार्च 2006 को अस्पताल में 100 स्टील बेड की मरम्मत और रंगाई का कार्य शुरू बताया गया था, जिसके लिए सोनी ड्रग प्वाइंट, गिरिडीह को कार्यादेश दिया गया. सप्लायर द्वारा 27 मार्च 2006 को बिल प्रस्तुत किया गया, इसमें काम पूरा होने का दावा किया गया.
जांच में सामने आयी
अनियमितता
हालांकि जांच में यह सामने आया कि 29 मार्च 2006 को तत्कालीन लिपिक द्वारा कोषागार में भुगतान के लिए जो बिल भेजा गया, उसकी मूल प्रति उपलब्ध नहीं थी. इतना ही नहीं, भंडार पंजी में भी किसी प्रकार की प्रविष्टि दर्ज नहीं की गई थी. बाद में सप्लायर द्वारा वाउचर संख्या 9 के माध्यम से सामग्री आपूर्ति का दावा किया गया, लेकिन उसका भी कोई रिकॉर्ड भंडार पंजी में नहीं पाया गया. जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि मात्र दो दिनों के भीतर 100 स्टील बेड की मरम्मत और रंगाई का कार्य पूरा दिखा दिया गया, जो संदेह के घेरे में है. इसके चौथे दिन ही बिल भुगतान के लिए कोषागार भेज दिया गया. इसके बाद मामले की गहन जांच में फर्जीवाड़े के कई संकेत मिलने लगे, जिससे अन्य मामलों में भी अनियमितता की आशंका जताई जा रही है.
क्या कहते हैं थाना प्रभारी
नगर थाना प्रभारी ज्ञान रंजन कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है और पुलिस जांच में जुटी हुई है. जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
