जांच टीम में रांची से आये फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी ऑफिस के कर्मी समेत अन्य शामिल थे. टीम ने ठेला, खोमचा, फास्ट फूड तथा मिठाई की दुकानों में खाद्य सामग्रियों की जांच की. टीम ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता, भंडारण व्यवस्था, उपयोग किये जा रहे पानी की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री के निर्माण और बिक्री की प्रक्रिया सहित कई बिंदुओं पका जानकारी ली.
जांच के लिए केमिकल डालने पर रसगुल्ला हो गया काला
चाट व मिठाई में इंडस्ट्रियल कलर पाया गया. मिठाई की एक दुकान में रसगुल्ले की जांच की गयी. केमिकल डालने पर रसगुल्ला काला हो गया. वहीं, कई अन्य भोजन सामग्री में मिलावटी पदार्थ पाये गये. टीम ने होटल व चाट-चाउमिन की दुकानों में ग्राहकों के बीच परोसे जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की बारीकी से जांच की गयी और सैंपल भी लिये.
फूड लाइसेंस लेने का दिया निर्देश
खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं देख टीम के सदस्यों ने नाराजगी जतायी. ठेला व दुकान में ना ही साफ-सफाई दिखा और ना ही खाद्य मानकों का पालन दिखा. खाद्य सुरक्षा इधिकारी ने सभी दुकानदारों और ठेला-खोमचा संचालकों को खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से फूड लाइसेंस प्राप्त करने का निर्देश दिया. एक सप्ताह में लाइसेंस नहीं बनाने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी. साफ-सफाई बनाये रखने, स्वच्छ पानी का उपयोग करने तथा खाद्य सामग्री को ढंककर रखने के निर्देश दिया. कहा गया कि मानवीय संवेदना का ख्याल रखते हुए दुकानदार खाद्य सामग्री परोसें. हानिकारक रंगों का उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.
स्वाद के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से नहीं होने दिया जायेगा खिलवाड़
स्वाद के नाम पर दुकानदार मानव के स्वस्थ जीवन से खिलवाड़ नहीं करें. इस दौरान लोगों को भी जागरूक किया गया. स्वच्छ व प्रमाणित स्थान से ही खाद्य सामग्री खरीदने तथा मिलावट या अशुद्धता की शिकायत विभाग से करने की अपील की गयी. बताते चलें कि पिछले 25 अप्रैल को बजटो गांव में गोलगप्पा खाने से एक बच्चे की मौत और लगभग 50 व्यक्तियों के बीमार होने पर प्रशासन गंभीर है. जांच टीम में प्रयोगशाला के तीन फूड एनालिस्ट शुभम कुमार, उदय कुमार और रोहित कुमार, फूड सेफ्टी ऑफिस के मो वसीम और आशीष कुमार शामिल थे.
