गिरिडीह प्रथम श्रेणी की न्यायिक दंडाधिकारी स्मिता त्रिपाठी ने वित्त विभाग में संयुक्त सचिव (भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी) व अंचल निरीक्षक को गबन और धोखाधड़ी के आरोप से रिहा कर दिया. सोमवार को भरी अदालत में यह फैसला सुनाया गया. मामले में बबलू अंसारी नामक व्यक्ति ने (जो कि अब स्वयं अधिवक्ता हैं) गिरिडीह के तत्कालीन अंचल अधिकारी विजय गुप्ता और वहीं पर स्थापित अंचल निरीक्षक दिलीप गुप्ता के विरुद्ध एक मुकदमा दायर किया था. आरोप लगाया था कि एक जमीन के नामांतरण के मामले में उक्त दोनों अधिकारियों ने उनसे 12000 तक लिये और काम भी नहीं किया, पारिवादी की ओर से सात लोगों की गवाही करायी गयी थी, जबकि बचाव पक्ष की ओर से कई सारे दस्तावेज दाखिल किये गये. बचाव पक्ष की ओर से यह दलील की गयी थी कि यह मामला केवल दबाव बनाने के लिए किया गया था, ताकि विवादित भूमि में उनके नाम की जमाबंदी कायम कर दी जाये, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से परिवाद पत्र में कहा गया कि नामांतरण के लिए उनसे रुपये लिये गये और सभी साक्षियों ने उनके इस आरोप की पुष्टि की. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने दोनों अभियुक्त को निर्दोष पाया और उन्हें रिहा कर दिया. बचाव पक्ष से अधिवक्ता महीनप मयंक ने बहस की थी, जबकि मुद्दई की ओर से अधिवक्ता युसूफ खान ने बहस की थी.
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