बेंगाबाद के हाई स्कूल मैदान में गुरूवार को जिला परिवहन विभाग की ओर से आयोजित ड्राइविंग लाईसेस कैंप में बहुत कम लोगों की मौजूदगी रही. स्कील टेस्ट प्रचार प्रसार के अभाव में फेल होता दिखा. लोगों ने कहा कि विभाग की ओर से ड्राइविंग कैंप के नाम पर महज खानापूर्ति कर कोरम पूरा करने का काम किया जा रहा है.
विभाग की ओर से क्षेत्र में कोई प्रचार प्रसार नहीं किया गया और ना ही आवेदकों के मोबाईल में मैसेज भेजा गया. ऐसे में अधिकतर आवेदकों के पास इसकी जानकारी ही नहीं पहुंच पाई. जबकि कुछ को पता भी चला तो गिरिडीह से बाहर होने के कारण उपस्थित होकर स्किल टेस्ट में शामिल हो पाना संभव नहीं था. ऐसे में गिने चुने आवेदक ही यहां पहुंचे.
4 में से एक युवक ने पास किया टेस्ट
कुल चार आवेदकों में से एक ने वाहन चलाने में सफलता पाई. वहीं विभागीय अधिकारियों ने भी कैंप में दिचलस्पी नहीं दिखाई. साढ़े दस बजे समय निर्धारण किये जाने के बाद भी सभी अधिकारी एक बजे हाई स्कूल मैदान पहुंचे. इसके बाद टेस्ट के लिए मार्किंग क्षेत्र बनाने में आधा घंटा बीत गया.
आवेदकों के अनुसार आवेदन की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि कोई चाहकर भी लाईसेंस नहीं बनवा सकता हैं. आवेदक मनोज कुमार, रमेश मरांडी, बिपिन कोल, आनंद राणा, प्रवीण कुमार सहित अन्य का कहना है कि विगत जुलाई महीने में प्रखंड में लगे शिविर में आवेदन किया था. आवेदन के समय भी बड़ी मुश्किल से स्लाॅट बुक करा पाये थे.
पैसे कटाने के बाद लिखित आवेदन दिया जबकि कई आवेदक आजतक लिखित परीक्षा नहीं दे पाये हैं. दो दिवसीय कैंप के दौरान लगभग दो सौ युवकों ने लिखित परीक्षा पास की है. परीक्षा पास करने के बाद वाहन चलाने का टेस्ट देने के लिए पूर्व से सूचना नहीं दिया गया.
ऐसे में बिना प्रचार प्रसार के प्रखंड स्तर पर कैंप लगा दिया गया. जबकि टेस्ट देने के पूर्व स्लाॅट बुक कर फीस जमा करना होता है. किसी प्रकार से कैंप की जानकारी मिली तो स्लाॅट फुल बता रहा है. ऐसे में कैंप का कोई मतलब नहीं है.
