देवरी देवपहाड़ी मंदिर के मठाधीश गौरवानंद महाराज ने कहा कि धर्म और सत्य के साक्षात प्रतीक थे परशुराम. भगवान परशुराम केवल शस्त्र के ही नहीं, बल्कि शास्त्र के भी ज्ञाता थे. वे सत्य, न्याय और धर्म की स्थापना के लिए जाने जाते थे. उनका जीवन हमें सिखाता है कि जब-जब समाज में अन्याय बढ़े, तब-तब शक्ति का प्रयोग मानवता की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए. समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और कुरीतियों को मिटाने की आवश्यकता है.
समाज को धर्म से जोड़ने पर बल
बाबा छोटे सरकार ने कहा कि आज हम सभी अपने पूर्वज भगवान परशुराम की विचारधारा को आत्मसात करने का संकल्प लें, तभी यह जयंती सार्थक हो सकती है. मारुतिनंदन पांडेय ने कहा कि जयंती समारोह तभी सार्थक होगा, जब हम और आप भगवान के बताये गये मार्ग पर चलकर धर्म की स्थापना करें और समाज को धर्म से जोड़ें. तभी यह जयंती सफल हो सकते है.
नयी पीढ़ी से संस्कृति व पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास से अवगत होने की अपील
मिर्जागंज गोशाला समिति के सचिव सुरजन सिंह ने शिक्षा और संस्कार के साथ नयी पीढ़ी को अपनी संस्कृति और पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास से अवगत होने पर जोर दिया. संचालन राजेंद्र प्रसाद राय ने किया. मौके पर सच्चिदानंद सिंह, अबोध राय, अमित सिंह, अशोक सिंह, सुरेंद्र राय, मनीष सिंह, निवास पांडेय, सुनील राय, दीपक राय, राजा सिन्हा, गिरिश राय, विकास मिश्रा आदि मौजूद थे.
