शहर से लेकर मोहल्लों की गलियों तक, अब शाम ढलते ही नशे का एक अघोषित बाजार सक्रिय हो जाता है. मामला सिर्फ शराब या गांजा तक सीमित नहीं रहा. अब मेडिकल दुकानों के जरिए नशीली दवाइयों का गुपचुप कारोबार हो रहा है. ये दवाइयां दिखने में सामान्य होती हैं. जैसे खांसी की सिरप, दर्द निवारक टैबलेट पर इनके अंदर मौजूद रासायनिक तत्व युवाओं को धीरे-धीरे नशे का आदी बना रहे हैं. शहर के कई इलाकों में यह आम बात हो गयी है कि बिना डॉक्टर की पर्ची के भी ऐसी दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं. कुछ मेडिकल दुकानों में तो कर्मियों को यह भी पता नहीं होता कि कौन-सी दवा नियंत्रित श्रेणी में आती है. इसका फायदा उठाकर नशे के आदी युवक बार-बार अलग-अलग दुकानों से दवाएं खरीद लेते हैं. ऐसे सिरप और टैबलेट की कीमतें मामूली होती हैं, इसलिए नशे का दायरा गरीब तबके तक भी फैल चुका है. वहीं कई युवक अब डेंड्रॉइट जैसी चिपकनेवाली चीजों को सूंघकर नशा करने की प्रवृत्ति भी अपनाने लगे हैं. यह प्रवृत्ति खासकर किशोरों और नाबालिगों के बीच तेजी से फैल रही है. सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह नशा बेहद खतरनाक रूप ले रहा है.
नशे में धुत होकर करते हैं मारपीट व छिनतई जैसे अपराध
नशे का असर अब समाज के ताने-बाने को प्रभावित कर रहा है. कई मोहल्लों में रात के समय झगड़ा, शोर-शराबा और तोड़फोड़ की घटनाएं आम होती जा रही हैं. राह चलते किसी से मामूली टकराहट भी झगड़े का रूप ले लेती है. नशे में लोग नियंत्रण खो देते हैं और किसी भी व्यक्ति से उलझ जाते हैं. शहर के अलावा इससे सटे आसपास की सड़कों पर देर शाम या रात को यह देखा जा सकता है कि कुछ युवा लड़खड़ाते कदमों से घूम रहे हैं, हाथों में सिरप की बोतलें या प्लास्टिक की थैलियां होती हैं, जिनमें नशीला पदार्थ रखा होता है. नशे के कारण कई परिवार बिखर रहे हैं. माता-पिता अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखकर परेशान हैं. कुछ युवक पढ़ाई बीच में छोड़कर नशे में डूब गए हैं. धीरे-धीरे यह लत उन्हें अपराध की ओर धकेल रही है. चोरी, झपटमारी और छिनतई जैसे मामलों में भी अब नशे की भूमिका सामने आने लगी है. कई बार तो ऐसा देखा गया है कि जब उनके पास नशा करने के लिए पैसे नहीं होते हैं तो वो किसी भी रह चलते लोग से पैसे की मांग करने लगते हैं. जब उन्हें पैसे नहीं दिए जाते हैं, तो वह उनके साथ उलझ पड़ते हैं और मारपीट पर भी उतारू हो जाते है. बात कहीं आगे ना बढ़ जाए इसकी वजह से लोग पुलिस से भी इसकी शिकायत करने से डरते हैं.प्रशासनिक सख्ती भी केवल कागजों तक ही रह गयी है सीमित
नशे के खिलाफ कई बार पुलिस और दवा नियंत्रण विभाग की ओर से बड़े-बड़े अभियान चलाने की घोषणाएं की गई हैं, पर जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है. बीते कुछ महीनों में कुछ चुनिंदा मेडिकल दुकानों पर छापेमारी जरूर हुई, कई दुकानदारों को नोटिस भी थमाया गया, लेकिन परिणाम कभी स्थायी नहीं रहे. कार्रवाई की गूंज कुछ दिनों तक जरूर सुनाई देती है, पर जैसे ही अधिकारियों की टीम वापस लौटती है, वैसा ही माहौल फिर से बन जाता है. दरअसल नशे की सप्लाई चेन हर बार नया रास्ता ढूंढ लेती है. यह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम करता है. जहां थोक विक्रेताओं से लेकर छोटे रिटेलर तक, सभी की एक अनकही समझ बनी हुई है. दवाओं की आपूर्ति इधर-उधर से मंगाकर की जाती है और उसे अलग-अलग माध्यमों से युवाओं तक पहुंचा दिया जाता है. कई बार यह पूरा कारोबार शहर के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और स्कूल-कॉलेजों के आसपास की छोटी दुकानों से संचालित होता है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन दुकानों के बाहर अक्सर युवाओं का आना जाना लगा रहता है, जो बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा खरीदते हैं. जांच की कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक दुकानें सतर्क रहती हैं, लेकिन धीरे-धीरे वही पुरानी स्थिति लौट आती है. प्रशासनिक स्तर पर कागजों में नशे के खिलाफ सख्ती जरूर दिखाई देती है, पर जमीनी हकीकत में यह सख्ती बस दिखावे तक सीमित रह गई है. कुल मिलाकर नशे के इस खेल में न तो कोई ठोस निगरानी तंत्र विकसित हो पाया है और न ही लगातार कार्रवाई की कोई ठोस रणनीति बनी है. परिणामस्वरूप हर कुछ महीनों में पुराने तरीके नए रूप में फिर से लौट आते हैं और शहर के युवाओं को नशे के इस जाल में फंसने से कोई नहीं रोक पा रहा है.नशे के ठिकानों पर होगी सख्त कार्रवाई : सदर एसडीपीओ
गिरिडीह के सदर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव ने बताया कि उन्हें भी नशीली दवाओं और डेंड्रॉइट जैसी चीजों की बिक्री की जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि पुलिस रणनीति बनाकर कार्रवाई करेगी. जहां-जहां इस तरह की बिक्री हो रही है, उन जगहों को चिह्नित किया जा रहा है और जल्द ही वहां छापेमारी कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कहा कि पुलिस ऐसे ठिकानों की पहचान कर रही है जहां नशीली चीजें बेची जा रही हैं. चिह्नित जगहों पर जल्द छापेमारी की जाएगी. कहा कि इस अभियान में पुलिस के साथ दवा नियंत्रण विभाग की भी भूमिका होगी, ताकि इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाई जा सके. कहा की कार्रवाई से युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
