आत्महत्या के लिए उकसाने में चार दोषी

गिरिडीह : जिला व अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) कुमार दिनेश की अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जागेश्वर पंडित (पिता बढन पंडित), नरेश पंडित पिता (जागेश्वर पंडित), जानकी देवी (पति जगेश्वर पंडित) तथा बढन पंडित को दोषी पाया है. सजा पर अदालत छह जुलाई को सुनवाई करेगी. यह मामला अहिल्यापुर थाना अंतर्गत […]

गिरिडीह : जिला व अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) कुमार दिनेश की अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जागेश्वर पंडित (पिता बढन पंडित), नरेश पंडित पिता (जागेश्वर पंडित), जानकी देवी (पति जगेश्वर पंडित) तथा बढन पंडित को दोषी पाया है. सजा पर अदालत छह जुलाई को सुनवाई करेगी. यह मामला अहिल्यापुर थाना अंतर्गत पहरामा गांव का है.
सूचक देवघर जिला अंतर्गत करौं थाना खंभराबाद निवासी मथुरा पंडित (पिता डेगो पंडित) के बयान पर अहिल्यापुर थाना में 19.04.2004 को प्राथमिकी (15/04) की गयी थी. मथुरा पंडित ने कहा कि उसने अपनी गीता की शादी 27.06.1997 को जागेश्वर पंडित के पुत्र नरेश पंडित के साथ की थी. शादी के बाद उसकी बेटी को एक लड़की भी हुई. कुछ दिन तक उसकी बेटी ससुराल में ठीक-ठाक रही, लेकिन बाद में नैहर से 50 हजार रुपये मांगकर लाने के लिए दबाव दिया जाने लगा और बेटी के साथ प्रताड़ित कर मारपीट की जाने लगी.
ससुराल वालों ने धमकी दी कि अगर मायके से 50 हजार लेकर नहीं आयी तो जान मारकर फेंक दिया जायेगा. बाद में उसे सूचना मिली कि उसकी बेटी को डायरिया हो गया है. जब वह बेटी की ससुराल पहुंचे तो देखा कि गोहाल में रस्सी से उसका शव लटका हुआ है. इसकी सूचना अहिल्यापुर थाना को दी. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेजा और बाद में आत्महत्या बताकर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दिया. कहा कि उसने परिवाद सह विरोध पत्र के आधार पर पुन:
केस शुरू करने की फरियाद अदालत से की. इसके बाद अदालत में चिकित्सक समेत छह गवाहों का बयान कलमबद्ध कराया गया. सत्रवाद संख्या 204/08 में उन्होंने बेटी पति के दामाद नरेश पंडित, ससुर जागेश्वर पंडित, सास जानकी देवी व दादा ससुर बढ़न पंडित को नामजद अभियुक्त बनाया. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी पारसनाथ सिंह ने अदालत में चिकित्सक समेत छह गवाहों का परीक्षण कराया. इसी मामले में अदालत ने चारों को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित(धारा 306) करने के मामले में दोषी पाया है. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रभात खेतान ने बहस की.

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