गढ़वा: कहते हैं, जहां चाह होती है, वहां राह अपने आप निकल आती है. जनप्रतिनिधियों के खोखले वादों और प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आ चुके कांडी प्रखंड के घटहुआं गांव के युवाओं ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है. श्मशान घाट जाने वाली जर्जर और दलदल बनी सड़क की सुध जब किसी जिम्मेदार ने नहीं ली, तो युवाओं ने किसी का इंतजार करने के बजाय खुद ही गांव की तकदीर और तस्वीर बदलने का बीड़ा उठा लिया.
छह बाइकों पर ढोया 3 किलोमीटर दूर से मोरम
घटना घटहुआं गांव की है, जहां उदय साह के घर से श्मशान घाट जाने वाला मुख्य मार्ग लंबे समय से जर्जर हाल में था. हालिया बारिश के बाद सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुकी थी. इससे अंतिम यात्रा में जाने वाले ग्रामीणों और राहगीरों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही थी.
जनप्रतिनिधियों के दर पर कई बार गुहार लगाने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो युवा कार्यकर्ता विपुल चौबे के नेतृत्व में युवाओं की टोली मैदान में उतरी. युवाओं ने अपनी छह मोटरसाइकिलों को ही 'मिनी टपर' बना लिया और गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर से मोरम व मिट्टी ढोकर लाने लगे. दिनभर चले इस 'ऑपरेशन कायाकल्प' में युवाओं ने बाइक से दर्जनों चक्कर लगाकर गड्ढों को भरा और सड़क को चलने लायक बनाया.
विरोध नहीं, हमारी नैतिक जिम्मेदारी : युवा
सड़क सुधारने में जुटे युवाओं ने कहा कि यह किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि अपनों की सहूलियत के लिए किया गया सामूहिक प्रयास है. युवाओं ने कहा कि रोजाना बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को इस दलदल से गुजरते देखना तकलीफदेह था. जब सिस्टम सो गया, तो युवाओं का जागना जरूरी था.
हालांकि, उन्होंने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस ग्रामीण सड़क का स्थायी पक्कीकरण कराए.
गांव से लेकर सोशल मीडिया तक युवाओं की तारीफ
युवाओं के इस अनूठे 'श्रमदान' और जज्बे की पूरे कांडी प्रखंड में जमकर चर्चा हो रही है. हर कोई इन युवाओं की पहल की सराहना कर रहा है.
इस सराहनीय कार्य में बीडीसी प्रत्याशी नितीश कुमार गुप्ता, अमीश गुप्ता, विवेक गुप्ता, अंकज गुप्ता, रोशन चौबे, पंकज गुप्ता व प्रीतम शर्मा समेत कई युवा कंधे से कंधा मिलाकर जुटे रहे.
