रमेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
डंडई (गढ़वा). डंडई प्रखंड के करके मध्य विद्यालय में बुधवार की शाम विद्यालय का ताला खोलकर मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का चावल बाहर निकालने का मामला सामने आया. चावल ले जा रहे एक युवक को ग्रामीणों और वार्ड सदस्यों ने मौके पर पकड़ लिया. घटना की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को विद्यालय खुलते ही ग्रामीण और अभिभावक परिसर में जुट गये. बैठक में एमडीएम के खाद्यान्न के रखरखाव और कथित कालाबाजारी को लेकर विद्यालय प्रबंधन से सवाल पूछे गये. जानकारी के अनुसार, बुधवार की शाम करीब सात बजे विद्यालय का ताला खोलकर एमडीएम का चावल बाहर निकाले जाने की बात सामने आयी. इसी दौरान वार्ड नंबर दो के सदस्य मिथिलेश प्रजापति और वार्ड नंबर आठ के सदस्य प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचे. दोनों ने चावल ले जा रहे युवक को पकड़ लिया. उसकी पहचान मेराल थाना क्षेत्र के बाना निवासी देवकुमार पासवान के रूप में बतायी गयी है. ग्रामीणों की मौजूदगी में जनप्रतिनिधियों ने चावल अपने पास रख लिया, जबकि युवक को रात में घर जाने दिया गया.
विद्यालय खुलते ही जुटे ग्रामीण और अभिभावक
गुरुवार की सुबह विद्यालय खुलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक परिसर में पहुंच गये. बैठक में विद्यालय की अध्यक्ष सीमा कुंअर, संयोजिका कल्पना देवी और प्रधानाध्यापक धनंजय तिवारी से पूरे मामले को लेकर पूछताछ की गयी. ग्रामीणों ने तीनों पर मिलीभगत कर बच्चों के भोजन के लिए उपलब्ध चावल की कथित कालाबाजारी करने का आरोप लगाया.
प्रधानाध्यापक ने आरोपों को निराधार बताया
हालांकि, अध्यक्ष, संयोजिका और प्रधानाध्यापक ने आरोपों को निराधार बताया. प्रधानाध्यापक धनंजय तिवारी ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाया गया आरोप सत्य साबित होता है, तो वह विद्यालय से त्यागपत्र दे देंगे. इसी दौरान ग्रामीणों ने सरकारी चावल से भरी बोरी मौके पर मौजूद होने की बात कही. बोरी सामने आने के बाद बैठक में कुछ देर के लिए स्थिति असहज हो गयी. ग्रामीणों ने दावा किया कि इसके बाद संबंधित लोगों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली. हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
बीआरसी के नाम पर खर्च लेने का भी आरोप
बैठक के दौरान अध्यक्ष सीमा कुंअर और संयोजिका कल्पना देवी ने प्रधानाध्यापक पर एक और आरोप लगाया. दोनों के अनुसार, प्रधानाध्यापक द्वारा उन्हें बताया जाता है कि बीआरसी कार्यालय से संबंधित खर्च भी देना पड़ता है. ऑडिट आदि के दौरान कभी तीन हजार तो कभी पांच हजार रुपये तक खर्च होने की बात बताकर विद्यालय स्तर पर राशि की व्यवस्था करने को कहा जाता है. हालांकि, इस आरोप की भी पुष्टि नहीं हो सकी है.
ऑडिट से जुड़े कागजात की जांच कराने की मांग
ग्रामीणों ने विद्यालय के अभिलेख, एमडीएम स्टॉक रजिस्टर, खर्च का ब्योरा और ऑडिट से जुड़े कागजात की जांच कराने की मांग की. अभिभावकों ने विद्यालय में उपलब्ध पंखे, कॉपी, कलम, किताब, पोशाक सहित अन्य सरकारी सामग्री के कथित दुरुपयोग की शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की. उनका कहना था कि इन सामग्रियों को लेकर पूर्व में बच्चों की ओर से भी शिकायत किये जाने की बात सामने आयी थी./
डीएसई बोले- गंभीर मामला, होगी जांच
ग्रामीणों और अभिभावकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाये जाने वाले लोगों के खिलाफ नियम संगत कार्रवाई की मांग की है. जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि मामला गंभीर है. इसकी जांच करायी जायेगी और संबंधित लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जायेगी. बैठक में मुखिया प्रतिनिधि ललन चौधरी, पूर्व मुखिया कन्हैया प्रजापति, पूर्व बीडीसी रणधीर सिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक प्रतिनिधि सह मंडल अध्यक्ष श्रवण कुमार चंद्रवंशी, वार्ड सदस्य मिथिलेश प्रजापति, प्रदीप कुमार, रवि, चुनमुन चौधरी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक उपस्थित थे.
