गढ़वा. वात्सल्य योजना के तहत जिला बाल संरक्षण इकाई में परामर्शदाता और सामाजिक कार्यकर्ता के पदों पर होने वाली बहाली प्रक्रिया विवादों में घिर गयी है. आवेदिका रिंकी कुमारी ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, उपायुक्त और समाज कल्याण विभाग के सचिव को शिकायत भेजी है.
चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्र पर सवाल
रिंकी कुमारी ने आरोप लगाया है कि चयनित अभ्यर्थियों ने संबंधित पद की योग्यता के अनुसार अनुभव प्रमाणपत्र जमा नहीं किया है. उनका कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों ने दूसरे क्षेत्र में काम करने से संबंधित अनुभव प्रमाणपत्र लगाया है. वहीं, संबंधित एनजीओ की सैलरी स्लिप भी जमा नहीं की गयी है. उन्होंने मांग की है कि चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों की निष्पक्ष तरीके से जांच करायी जाये, ताकि बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.
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नौ साल का अनुभव होने के बावजूद अयोग्य
रिंकी कुमारी ने बताया कि उन्होंने परामर्शदाता पद के लिए नौ साल का अनुभव प्रमाणपत्र जमा किया था. इसके बावजूद कंप्यूटर प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण उन्हें अयोग्य कर दिया गया. वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता पद के लिए अनुभव प्रमाणपत्र नहीं देने की बात कहकर उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया. उन्होंने कहा कि यदि चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच नहीं की गयी, तो वह न्यायालय का रुख करेंगी.
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सत्यापन के बाद होगी प्रमाणपत्रों की जांच
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अशोक नायक ने कहा कि प्रमाणपत्रों का अभी सत्यापन नहीं हुआ है. चयन समिति की ओर से आगे सभी प्रमाणपत्रों की जांच संबंधित संस्थानों से करायी जायेगी. सत्यापन के बाद ही प्रमाणपत्रों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.
