होटल में पकड़े गये दो जोड़ों ने की सड़क पर शादी

गढ़वा के तीन होटलों में की गयी थी छापेमारी, 11 जोड़ों को पुलिस ने हिरासत में लिया था

गढ़वा के तीन होटलों में की गयी थी छापेमारी, 11 जोड़ों को पुलिस ने हिरासत में लिया था जितेंद्र सिंह, गढ़वा शहर के तीन होटलों में हुई छापेमारी के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई को सुर्खियों में ला दिया, बल्कि समाज के कई जटिल सवालों को भी एक साथ खड़ा कर दिया है. होटलों में छापेमारी के बाद पुलिस ने 11 जोड़ों को हिरासत में लिया था, जिसमें से दो जोड़ों ने अचानक सड़क पर बिना किसी रीति-रिवाज के शादी कर ली, जो अब पूरे जिले में बहस का केंद्र बन चुका है. बता दें कि सोमवार को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के होटल एसएनसी, होटल आरडीएस और रंका रोड स्थित होटल तिवारी इन में एक साथ छापेमारी की थी. इस कार्रवाई में 11 जोड़ों (28 लोगों) को हिरासत में लिया गया था. होटल के कमरों से सीधे थाने पहुंचे इन लोगों के सामने अचानक एक ऐसी स्थिति खड़ी हो गयी, जहां निजी रिश्ते सार्वजनिक जांच के दायरे में आ गये. पूछताछ, कानूनी औपचारिकताओं और परिजनों को सूचना देने के बीच माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया. सामाजिक दबाव, परिवार की मौजूदगी और कानूनी कार्रवाई की आशंका के बीच कुछ जोड़ों ने अपने रिश्ते को छिपाने के बजाय उसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का रास्ता चुना. इसके बाद थाने में ही जरूरी प्रक्रिया पूरी करायी गयी, बॉन्ड भरवाये गये और परिजनों की मौजूदगी में दो जोड़ों ने शादी कर ली. न बैंड-बाजा न बारात, कुछ गवाहों के सामने हुई शादीथाने से बाहर निकलते ही जो दृश्य सामने आया, वह गढ़वा के लिए बिल्कुल नया था. न बैंड-बाजा, न बारात, न पंडित सिर्फ सड़क किनारे कुछ गवाह की मौजूदगी में दोनों जोड़ों ने शादी की. वीडियो वायरल, शहर में चर्चा तेज मौके पर मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया. देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. हर गली, हर चौक और हर चर्चा में अब यही सवाल गूंज रहा है. क्या यह शादी थी या दबाव में लिया गया फैसला. छह आरोपियों को भेजा जेल, 12 नामजद पर प्राथमिकीइस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह आरोपियों को जेल भेज दिया है, जबकि 12 नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए जरूरी थी. समाज के आइने में कई सवाल – क्या बालिग लोगों के निजी रिश्तों में इस तरह की दखल सही है. – क्या सामाजिक दबाव में की गयी शादी वास्तव में स्वीकृत है. – क्या कानून और नैतिकता की सीमाएं स्पष्ट हैं, या वे परिस्थितियों के साथ बदलती हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >