गढ़वा में गैस की कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, एसडीएम ने धंधेबाज को पकड़ दुकान किया सील

LPG Black Marketing: गढ़वा में एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा हुआ, जहां एसडीएम ने व्हाट्सएप शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यवसायी को रंगे हाथों पकड़ा. अवैध भंडारण के कारण दुकान सील कर दी गई. प्रशासन पूरे नेटवर्क की जांच में जुटा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट

LPG Black Marketing: झारखंड के गढ़वा में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक व्यवसायी को रंगे हाथों पकड़ लिया. अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने व्हाट्सएप पर मिली शिकायत की पुष्टि करते हुए मौके पर छापेमारी की और दुकान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया. इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है.

व्हाट्सएप शिकायत बनी कार्रवाई का आधार

प्रशासन को यह सूचना व्हाट्सएप के जरिए मिली थी कि एक व्यक्ति घरेलू गैस सिलेंडर को अवैध रूप से 2700 रुपए में बेच रहा है. शिकायत मिलते ही एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत लोकेशन की जानकारी जुटाई. महज 10 मिनट के भीतर ही वे प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी राहुल मिंज के साथ मौके पर पहुंच गए.

मौके पर पहुंचकर पकड़ा गया आरोपी

जांच के दौरान आरोप सही पाए गए. संबंधित व्यवसायी मेन रोड स्थित विजय कश्यप के मकान में किराए पर किचन पार्ट्स और गैस चूल्हे की दुकान चला रहा था. इसी दुकान के पीछे बने बेसमेंट में अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का भंडारण किया जा रहा था. प्रशासन ने तत्काल दुकान को बंद करवा दिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी.

लंबे समय से चल रहा था अवैध कारोबार

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था. घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले एलपीजी सिलेंडरों को गलत तरीके से एकत्रित कर ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा था. यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है.

मकान मालिक की भी तय होगी जिम्मेदारी

एसडीएम संजय कुमार ने मौके पर मकान मालिक और आरोपी व्यवसायी से पूछताछ की और उनसे लिखित जवाब मांगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि घनी आबादी के बीच अवैध रूप से गैस सिलेंडर रखने की अनुमति देने के कारण मकान मालिक की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी. इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटा प्रशासन

प्रशासन अब इस अवैध कारोबार के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गया है. एसडीएम ने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सिलेंडर कहां से लाए जा रहे थे और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. संबंधित गैस एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जाएगी. दोषी पाए जाने पर सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

कालाबाजारी पर सख्त रुख

एसडीएम ने सख्त लहजे में कहा कि आपदा के समय में अवसर तलाशने वाले ऐसे लालची कारोबारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति इस तरह के अवैध कार्यों में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

आम जनता से सहयोग की अपील

प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है. एसडीएम ने कहा कि यदि कहीं भी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी या अवैध भंडारण की सूचना मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें. इससे समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी और बड़े हादसों को रोका जा सकेगा.

सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला

घनी आबादी वाले इलाके में गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण एक गंभीर सुरक्षा खतरा है. इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. प्रशासन की इस कार्रवाई को न सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने बल्कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

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आगे भी जारी रहेगा अभियान

एसडीएम संजय कुमार ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस तरह के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले में कालाबाजारी और अवैध भंडारण की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित और उचित दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध हो सके.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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