Garhwa News: हर दिन करीब 6 लोगों को डस रहा सांप, गढ़वा में 78 दिन में 435 सर्पदंश के मामले

गढ़वा जिले में बारिश और धान की खेती के मौसम के साथ सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है. पिछले 78 दिनों में 435 लोग सांप का शिकार हुए हैं, जिनमें सितंबर में तीन मौतें भी शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग ने सावधानी बरतने की अपील की है.

गढ़वा. बारिश और धान की खेती के मौसम में गढ़वा में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई से 16 सितंबर तक जिले में 435 लोग सर्पदंश के शिकार हुए हैं. 78 दिनों में सामने आये 435 मामलों का औसत निकालें, तो हर दिन 5.6 लोग यानी करीब छह लोग सांप के डंसने के बाद अस्पताल पहुंचे. सितंबर में अब तक सर्पदंश से तीन लोगों की मौत भी हुई है. आंकड़े बरसात और खेती के मौसम में जिले के ग्रामीण इलाकों में बढ़ते सर्पदंश के खतरे की गंभीर तस्वीर सामने ला रहे हैं.

खेत में काम के दौरान बढ़ रहा खतरा

धान की रोपाई, निकाई-गुड़ाई और खेतों में दूसरे कृषि कार्य के दौरान किसान और मजदूर सर्पदंश का शिकार हो रहे हैं. बारिश के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर खेतों, मेड़ और आसपास के इलाकों में पहुंच रहे हैं. ऐसे में खेतों में काम करने वालों के लिए विशेष सावधानी जरूरी है.

जुलाई में 187, अगस्त में 179 मामले

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जुलाई में 187 लोग सर्पदंश के शिकार हुए. इनमें 75 पुरुष और 112 महिलाएं शामिल हैं. अगस्त में 179 लोगों को सांप ने डसा, जिसमें 87 पुरुष और 92 महिलाएं थीं. सितंबर में 16 सितंबर तक 69 लोग सर्पदंश के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे हैं. इस तरह तीन महीनों में कुल 435 मामले सामने आये हैं.

दो महीने में पुरुषों से 42 अधिक महिलाएं बनीं शिकार

जुलाई और अगस्त के 366 मामलों में 204 महिलाएं और 162 पुरुष सर्पदंश के शिकार हुए. यानी इन दो महीनों में पुरुषों की तुलना में 42 अधिक महिलाएं अस्पताल पहुंचीं.

झाड़-फूंक में बीत रहा समय, इलाज में हो रही देर

सर्पदंश के बाद समय पर अस्पताल पहुंचने के बजाय कई लोग अब भी झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार के चक्कर में पड़ जाते हैं. इससे मरीज को अस्पताल पहुंचाने में काफी देर हो जाती है. जहरीले सांप के काटने के मामलों में उपचार में हुई यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है. स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने और सर्पदंश की स्थिति में सीधे अस्पताल पहुंचने की अपील कर रहा है.

अस्पतालों में एंटी वेनम उपलब्ध : गौरव कुमार

डीपीएम (स्वास्थ्य) गौरव कुमार ने बताया कि जिले के अस्पतालों में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटी वेनम उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि लोगों को लगातार अंधविश्वास से दूर रहने और झाड़-फूंक के बजाय सर्पदंश के मरीज को सीधे अस्पताल लाने के लिए जागरूक किया जा रहा है. सांप काटने के बाद बिना समय गंवाये मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी है.

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खेत में उतरने से पहले बरतें सावधानी

बरसात में खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. धान के खेत में उतरते समय जूते या अन्य सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल करना चाहिए. रात में बिना रोशनी के खेत या आसपास के स्थान पर जाने से बचना चाहिए. घर और खेत के आसपास झाड़ियों एवं कचरे की नियमित सफाई भी जरूरी है. सर्पदंश की स्थिति में मरीज को शांत रखते हुए तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए.

आंकड़ों में सर्पदंश का खतरा

  • जुलाई : 187 मामले - 75 पुरुष, 112 महिलाएं
  • अगस्त : 179 मामले - 87 पुरुष, 92 महिलाएं
  • सितंबर (16 तक) : 69 मामले
  • कुल : 435 मामले
  • अवधि : 78 दिन
  • दैनिक औसत : 5.6 मामले, यानी हर दिन करीब 6 लोग
  • जुलाई-अगस्त : 204 महिलाएं, 162 पुरुष
  • सितंबर में मौत : 3

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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