झारखंड सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर और राज्य की नौकरशाही के बीच जारी तल्खी के बीच भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने एक बड़ा सियासी दांव चला है. भानु प्रताप शाही ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को पत्र लिखकर उन्हें सरकार के खिलाफ बगावत करने की सलाह दी है. शाही ने पत्र में कहा है कि सरकार में 'नंबर दो' के कद्दावर मंत्री होने के बावजूद राधाकृष्ण किशोर नौकरशाही के सामने लाचार, बेबस और असहाय दिख रहे हैं.भानु ने वित्त मंत्री श्री किशोर को नसीहत दी है कि इस तरह घुट-घुट कर मंत्री पद की शोभा बढ़ाने और किसी अपमानजनक बर्खास्तगी का इंतजार करने से बेहतर होगा कि वे सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकें और अपना इस्तीफा दे मारें.
बिना 'ऊपर वाले बॉस' के इशारे पर अधिकारी नहीं दिखा सकते अंगूठा?
भानु प्रताप शाही ने पत्र में लिखा है कि पलामू की माटी का बेटा होने के नाते उनसे राधाकृष्ण किशोर की यह दुर्दशा देखी नहीं जा रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजनीति का इतना लंबा अनुभव रखने के बाद भी अगर वित्त मंत्री को यह आंतरिक खेल समझ नहीं आ रहा, तो उनकी सादगी पर तरस आता है. शाही ने सीधे तौर पर उच्च स्तर की ओर इशारा करते हुए कहा कि बिना 'ऊपर वाले बॉस' की हरी झंडी के सचिवालय में बैठे चंद अधिकारी एक कैबिनेट मंत्री के पत्र को अंगूठा दिखाने की हिमाकत कभी नहीं कर सकते हैं.भाजपा नेता ने गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सत्ता को 'अनुभवी मार्गदर्शकों' की नहीं, बल्कि केवल जी-हुजूरी करने वालों की दरकार है. उन्होंने दावा किया कि परदे के पीछे यह पूरी पटकथा लिखी जा रही है कि या तो वित्त मंत्री खुद इस रोज-रोज के अपमान से तंग आकर घर बैठ जाएं, या फिर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए. शाही ने कहा कि राज्य की नौकरशाही के आगे पलामू का कोई बड़ा नेता इतना लाचार और बेबस दिखे, यह इस माटी के लोगों के लिए पूरी तरह से असहनीय है.
