गढ़वा : झारखंड के गढ़वा जिला समाहरणालय के सभागार में मंगलवार को आयोजित उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की जनसुनवाई सिर्फ फरियादियों का मजमा भर नहीं थी, बल्कि यह निचले स्तर के प्रशासनिक ढुलमुल रवैये और संवेदनहीनता का आईना भी बन गई. दूर-दराज के गांवों से पहुंचे बेबस फरियादियों की आपबीती सुनकर साफ जाहिर हुआ कि कैसे दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर आम जनता पस्त हो चुकी है. हालांकि, डीसी ने शिकायतों को संवेदनशीलता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और कड़े लहजे में कहा कि जनशिकायतों के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
कागज में मर गई जिंदा महिला, बच्चे दाने को मोहताज
जनसुनवाई के दौरान खरौंधी प्रखंड के राजी गांव से पहुंची राशिला देवी की आपबीती सुनकर समाहरणालय में मौजूद लोग सन्न रह गए. चार छोटे-छोटे बच्चों को गोद में समेटे इस विधवा महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि ब्लॉक के जिम्मेदारों ने उसे कागजों पर ‘मृत’ घोषित कर उसका राशन कार्ड बंद कर दिया था. पति के साये से महरूम महिला अब बच्चों के भरण-पोषण के लिए दफ्तरों की ठोकरें खाने को मजबूर है. महिला ने डीसी के सामने गुहार लगाते हुए पूरे मामले की जांच और राशन कार्ड तत्काल बहाल करने की मांग रखी.
कोर्ट के आदेश के बाद भी बुलडोजर का खौफ
प्रशासनिक लापरवाही का एक और गंभीर मामला गढ़वा के बनपुरवा से सामने आया. गांव की प्रमिला देवी ने डीसी को बताया कि उनकी खरीदी गई रैयती भूमि पर सिविल कोर्ट से पक्ष में फैसला (डिक्री) मिलने के बावजूद दबंग बेखौफ हैं. महिला की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर जेसीबी से खेत की मेड़ तोड़ दी गई और कब्जा करने की कोशिश की जा रही है. विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं.
ऑनलाइन पैसा जमा, लेकिन कृषि विभाग बेखबर
खरौंधी के सुंडी गांव निवासी बसंत मिंज ने बताया कि उन्होंने बीती अप्रैल माह में ही सोलर पंप सेट के लिए विभागीय नियमानुसार ऑनलाइन भुगतान कर दिया था. लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कृषि विभाग की सुस्ती के कारण न तो पंप सेट मिला और न ही जमा राशि वापस हुई. वहीं, श्री बंशीधर नगर के मर्चवार की इंटरमीडिएट पास तलाकशुदा युवती प्रियंका कुमारी ने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए जिला प्रशासन से रोजगार दिलाने की मार्मिक अपील की.
40 अन्य आवेदनों पर भी सख्त निर्देश
जनसुनवाई के दौरान सामाजिक सुरक्षा पेंशन, भूमि विवाद, अवैध कब्जे, पीएम आवास, बकाया वेतन और मनरेगा भुगतान जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़े कुल 40 अन्य आवेदन भी प्राप्त हुए. मामलों की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आमजनों की शिकायतों का निष्पादन पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध सीमा के भीतर होना चाहिए. डीसी ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि आवश्यकता पड़ने पर खुद अधिकारी स्थल जांच करें और वास्तविक स्थिति के आधार पर त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट सौंपें.
