जन्म रजिस्टर में हेरफेर कर बदले माता-पिता के नाम, दत्तक कानून की उड़ी धज्जियां

जन्म रजिस्टर में हेरफेर कर बदले माता-पिता के नाम, दत्तक कानून की उड़ी धज्जियां

प्रभाष मिश्रा, गढ़वा गढ़वा सदर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अस्पताल कर्मियों की कथित मिलीभगत से दत्तक कानून की खुलेआम अनदेखी की जा रही है. सदर अस्पताल की लेबर रूम इंचार्ज ने अस्पताल की उपाधीक्षक को लिखित शिकायत की है, जिसमें बताया गया है कि कानूनी प्रक्रिया के बिना ही नवजात बच्चों को दूसरे लोगों को सौंपा जा रहा है. इस पूरे मामले में एएनएम तारामणि कुजूर का नाम सामने आया है. इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है. गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में इसी अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल भेजकर प्रति मरीज पांच हजार रुपये कमीशन लेने का मामला भी सामने आया था. उस मामले में जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में नये खुलासे ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. क्या है पूरा मामला गढ़वा शहर के पाठक मोहल्ला निवासी रवि कुमार की पत्नी रूपा देवी को 21 फरवरी 2026 को दोपहर दो बजे प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसी दिन 2:35 बजे उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया. सूत्रों के अनुसार, रूपा देवी को पहले से ही तीन बेटियां थीं और अल्ट्रासाउंड में भी गर्भ में बच्ची होने की जानकारी मिल चुकी थी. इसके बाद उन्होंने अपने नि:संतान भाई-भाभी (पलामू जिले के हैदरनगर निवासी) को बच्ची देने का फैसला कर लिया. प्रसव के समय अस्पताल के सभी दस्तावेजों ओपीडी पर्ची, बेडहेड टिकट, रजिस्टर और जन्म प्रमाण पत्र के लिए भरे गये फॉर्म में माता-पिता के रूप में रूपा देवी और उनके पति लव कुमार का नाम दर्ज था. इसी बीच हैदरनगर निवासी उनके भाई राजू कुमार कांस्यकार और उनकी पत्नी कामिनी साहु अस्पताल पहुंचे. उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद नर्सों से रजिस्टर में माता-पिता का नाम बदलने का आग्रह किया, लेकिन नर्सों ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए मना कर दिया. आरोप है कि बाद में दूसरी शिफ्ट में ड्यूटी पर आयी एएनएम तारामणि कुजूर ने रजिस्टर में काट-छांट कर नवजात के माता-पिता का नाम बदल दिया. दस्तावेजों में कामिनी साहु और राजू कुमार कांस्यकार का नाम दर्ज कर दिया गया. यहां तक कि जन्म प्रमाण पत्र के फॉर्म में भी नाम बदल दिये गये. इसके बाद दंपती नवजात बच्ची को अपने साथ लेकर चले गये. माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि जन्म प्रमाण पत्र में भी उनका ही नाम दर्ज हो जाये और आगे कोई कानूनी परेशानी न हो. ऐसे हुआ मामले का खुलासा 12 मार्च को रूपा देवी और उनके पति फिर से अस्पताल पहुंचे. उन्होंने पेट दर्द और दूध सुखाने की दवा की बात कही. संयोग से उसी समय प्रसव कराने वाली नर्सों की टीम ड्यूटी पर थी. बातचीत के दौरान नवजात को रिश्तेदारों को देने और रजिस्टर में नाम बदलने की पूरी सच्चाई सामने आ गयी. इसके बाद लेबर रूम की इंचार्ज नर्स ने पूरे मामले की लिखित जानकारी अस्पताल की उपाधीक्षक को दी. क्या कहता है अस्पताल प्रशासन सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ माहेरू यामिनी ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है. सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ की शिकायत मिली है और इसकी जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है. जांच में जो भी दोषी पाये जायेंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जायेगी.

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By Akarsh aniket

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