श्री बंशीधर नगर: सत्संग उपासना केंद्र उर्जीतपा के प्रांगण में शनिवार की शाम श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के अनुयायियों ने सत्संग का आयोजन किया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, शंख ध्वनि और वंदे पुरुषोत्तम के जयघोष के साथ हुई. इसके बाद सभी जीवों के मंगल की कामना को लेकर सामूहिक नाम जप-ध्यान किया गया. अनुयायियों ने श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के हस्तलिखित सत्यानुसरण एवं नारीनीति ग्रंथ का पाठ भी किया.
कर्म को बताया प्रधान
इष्ट चर्चा के दौरान ऋत्विक विजय नंदन सिन्हा ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को गुरु के बताये मार्ग पर चलते हुए कर्म करना चाहिए. कर्म ही प्रधान है और मनुष्य को अपने कर्म के अनुरूप ही फल प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक युग में पुरुषोत्तम का अवतार हुआ है, जिन्होंने कर्म को प्रधानता देते हुए स्वयं कर्म करके उसका मार्ग दिखाया. पुरुषोत्तम गुरु जीवों के कल्याण के लिए उचित पथ दिखाते हैं और उस पथ पर चलकर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक कर सकता है.
सत्संगी शक्ति दास ने कहा कि मन को हमेशा गुरु में लगाये रखने से भक्ति की प्राप्ति होती है. भक्ति में अनंत शक्ति है, जो मनुष्य को आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ाती है. उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से प्रभु का नाम जपते रहने से ऊर्जा मिलती है और इसका मनुष्य के शरीर एवं मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
कार्यक्रम का संचालन कर रहे ऋत्विक धृति सुंदरलाल ने कहा कि भाद्रपद माह पवित्र माह है. इसी माह में श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का अवतार हुआ था. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय और भाषा के लोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के साथ व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन को सुंदर बनाने का प्रयास कर रहे हैं.
कार्यक्रम का समापन संध्याकालीन विनती-प्रार्थना और जयघोष के साथ हुआ. मौके पर याजक राजकुमार दा, अजय कुमार, संजय दा, अजय दा, श्रीकांत कुमार, धृतिदीप, शंकर ठाकुर, हीरा प्रसाद, अनीता देवी, कलावती देवी, रामादेवी, लीलावती देवी, निर्मला मां, प्रभादेवी, प्रमिला देवी, दीपमाला अंबष्ठ, दयामयी अंबष्ठ सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे.
