भवनाथपुर में 41 साल से यात्री ट्रेन का इंतजार, घोषणा और सर्वे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

गढ़वा के भवनाथपुर और आसपास के लोगों की यात्री ट्रेन की मांग चार दशक बाद भी पूरी नहीं हुई है. 1985 से उठ रही इस मांग के बीच 2007 में यात्री ट्रेन चलाने की घोषणा और 2009 में रेल लाइन विस्तार का सर्वे भी हुआ, लेकिन सेवा शुरू नहीं हो सकी. अब 2026 में मेराल-भवनाथपुर-चोपन रेल सेवा की मांग को लेकर ग्रामीणों ने फिर आंदोलन तेज किया है.

जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट

गढ़वाः भवनाथपुर और आसपास के लोगों के लिए रेल आज भी इंतजार की कहानी बनी हुई है. करीब चार दशक से यात्री ट्रेन चलाने की मांग उठ रही है, लेकिन अब तक यह मांग धरातल पर नहीं उतर सकी है. वर्ष 1985 से शुरू हुआ यह सिलसिला जनप्रतिनिधियों से लेकर संसद और रेल मंत्रालय तक पहुंचा. वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सार्वजनिक मंच से यात्री ट्रेन चलाने की घोषणा की. इसके बाद वर्ष 2009 में मेराल से टाउनशिप होते हुए उत्तर प्रदेश के सलाईबनवा स्टेशन तक रेल लाइन विस्तार का सर्वे भी कराया गया. लेकिन घोषणा और सर्वे के बाद भी यात्री ट्रेन का परिचालन शुरू नहीं हो सका.

माल ढुलाई के लिए बिछी थी 34 किमी रेल लाइन

भवनाथपुर की खदानों से लाइम स्टोन और डोलोमाइट की ढुलाई के लिए मेराल से भवनाथपुर तक करीब 34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई गई थी. इस रेलखंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से मालगाड़ियों के परिचालन के लिए होता था. घाघरा और तुलसीदामर क्षेत्र से निकलने वाले खनिज को बोकारो, भिलाई और राउरकेला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक भेजा जाता था. समय के साथ खनन और उससे जुड़े कार्य बंद होते गए. वर्ष 1990 में क्रशिंग प्लांट बंद हुआ, जबकि वर्ष 2020 में डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद मालगाड़ियों का परिचालन भी थम गया. इसके बाद इस रेलखंड का नियमित उपयोग लगभग समाप्त हो गया.

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घोषणा हुई, सर्वे भी कराया गया, लेकिन आगे नहीं बढ़ी बात

वर्ष 2007 में भवनाथपुर क्षेत्र में यात्री ट्रेन चलाने की घोषणा हुई थी. इसी दौर में लोकसभा में रेल बजट पर चर्चा के दौरान गढ़वा-भवनाथपुर क्षेत्र के लिए नई ट्रेन चलाने की मांग भी दर्ज हुई थी. इसके दो साल बाद वर्ष 2009 में तत्कालीन सांसद घूरन राम की मांग पर मेराल से टाउनशिप होते हुए उत्तर प्रदेश के सलाईबनवा स्टेशन तक रेल लाइन विस्तार का सर्वे कराया गया. लेकिन सर्वे के बाद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी. इस तरह घोषणा और सर्वे दोनों के बावजूद यात्री रेल सेवा धरातल पर नहीं उतर पाई.

2022 में ज्ञापन, 2026 में फिर तेज हुआ आंदोलन

यात्री ट्रेन की मांग को लेकर वर्ष 2022 में मेराल रेलवे स्टेशन पर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धनबाद रेल मंडल के डीआरएम के नाम ज्ञापन सौंपा था. इसमें मेराल-भवनाथपुर रेल लाइन पर यात्री ट्रेन चलाने की मांग की गई थी. अब वर्ष 2026 में यह मांग फिर आंदोलन का रूप ले रही है. सितंबर में भवनाथपुर और खरौंधी क्षेत्र में बैठकों के बाद मेराल-भवनाथपुर-चोपन रेल सेवा की मांग को लेकर संघर्ष समिति बनाने की पहल हुई. 21 सितंबर को मझिआंव प्रखंड के दवनकरा में रेलवे लाइन के किनारे ग्रामीणों की बैठक हुई. ग्रामीणों ने रेल मंत्री के नाम मांगपत्र भेजकर यात्री ट्रेन चलाने की मांग की है. साथ ही 15 दिनों में सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.

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अब बरवाडीह से आगे चोपन तक रेल संपर्क की मांग

चार दशक पहले मांग मुख्य रूप से भवनाथपुर को बरवाडीह से जोड़कर यात्री ट्रेन चलाने तक सीमित थी. अब इसका दायरा बढ़ गया है. स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों की ओर से मेराल-भवनाथपुर-खरौंधी-कोन-सलाईबनवा होते हुए चोपन तक रेल संपर्क विकसित करने की मांग उठायी जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि रेल सेवा शुरू होने से भवनाथपुर, मेराल, खरौंधी, केतार, मझिआंव, बरडीहा, विशुनपुरा समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आवागमन का वैकल्पिक साधन मिल सकता है. छात्रों, मजदूरों, किसानों, मरीजों और छोटे कारोबारियों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

पटरी पहले से मौजूद, फिर भी यात्री सेवा का इंतजार

इस पूरे मामले का अहम पहलू यह है कि मेराल से भवनाथपुर तक रेल ढांचा पहले से मौजूद है, लेकिन इसका इस्तेमाल यात्री परिवहन के लिए नहीं हो रहा है. लंबे समय तक मालगाड़ी का परिचालन बंद रहने के कारण रेल लाइन के रखरखाव और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. ट्रैक से जुड़ी सामग्री चोरी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं. ऐसे में यात्री सेवा शुरू करने से पहले रेलखंड की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा और आवश्यक मरम्मत का आकलन महत्वपूर्ण होगा. स्थानीय लोगों की मांग है कि पहले मेराल-भवनाथपुर के मौजूदा रेलखंड की तकनीकी जांच कर यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में पहल की जाए. इसके बाद चोपन तक रेल विस्तार पर काम किया जाए.

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चार दशक का सफर

1985: भवनाथपुर को रेल यातायात से जोड़ने और यात्री ट्रेन चलाने की मांग शुरू.

2007: तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा यात्री ट्रेन चलाने की सार्वजनिक घोषणा. लोकसभा में भी मांग दर्ज.

2009: मेराल-टाउनशिप-सलाईबनवा रेल विस्तार का सर्वे कराया गया.

2020: डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद मालगाड़ी का परिचालन ठप.

2022: मेराल स्टेशन पर डीआरएम के नाम ज्ञापन देकर यात्री ट्रेन की मांग दोहरायी गई.

2026: भवनाथपुर, खरौंधी और मझिआंव क्षेत्र में बैठकों के बाद आंदोलन फिर तेज हुआ.

सवाल अब भी वही, कब दौड़ेगी यात्री ट्रेन?

घोषणा हुई, सर्वे कराया गया, ज्ञापन सौंपे गये और अब आंदोलन भी तेज हो रहा है. इसके बावजूद भवनाथपुर की रेल पटरी पर यात्री ट्रेन का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. चार दशक से चली आ रही यह मांग अब इस सवाल पर टिक गई है कि मौजूदा रेलखंड की तकनीकी स्थिति की जांच कर यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में रेलवे कब ठोस पहल करता है.

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By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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