अविनाश की रिपोर्ट
Garhwa News: जब समाज अपनी प्राकृतिक धरोहरों को भूलकर अपनी व्यस्त दिनचर्या के दायरों में सिमटने लगता है, तब उसे जगाने के लिए किसी भगीरथ प्रयास और मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है. झारखंड के गढ़वा जिले में इन दिनों ठीक ऐसा ही एक सकारात्मक बदलाव धरातल पर उतर रहा है. अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल ने जिले में वो कर दिखाया है, जो अमूमन सरकारी फाइलों में ही दबा रह जाता है. सरस्वतिया नदी को उसका पुराना स्वरूप और नया जीवन लौटाने के लिए शुरू हुआ “आपन सरस्वतिया” अभियान अब महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह गढ़वा और मेराल की जनता का साझा संकल्प और एक बड़ा जनआंदोलन बन चुका है.
लगातार आठवें दिन भी जारी रहा अभियान
इसी कड़ी में मंगलवार को गढ़वा शहर में लगातार आठवें दिन और मेराल क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन भी नदी की सफाई, डी-सिल्टिंग यानी गाद हटाने और अतिक्रमण मुक्ति का कार्य युद्ध स्तर पर जारी रहा, जिसे स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का स्वस्फूर्त और व्यापक सहयोग मिल रहा है. सालों से कचरे और गाद के नीचे दबी सरस्वतिया नदी के स्वरूप में अब धीरे-धीरे साफ बदलाव दिखने लगा है, जो इस बात का प्रमाण है कि समाज अपनी अनमोल प्राकृतिक धरोहरों को बचाने के लिए पूरी तरह से आगे आ रहा है.
गणमान्य नागरिकों ने किया श्रमदान
गढ़वा शहर में चल रहे अभियान के आठवें दिन समाज के प्रतिष्ठित चेहरों ने खुद जमीन पर उतरकर श्रमदान किया और लोगों को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. अभियान में शहर के मशहूर चिकित्सक डॉ. पतंजलि केसरी ने विशेष भूमिका निभाई, जबकि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर अमोद कुमार सिंह, बड़ू दुबे, सुनील बिंद, अरविंद कुमार मेहता, लाल बहादुर साव और अजय पाठक सहित लगभग एक दर्जन गणमान्य नागरिकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई.
मशीनों की मदद से तेज हुई सफाई
नदी क्षेत्र में वर्षों से जमा गाद और कचरे को हटाने का काम भारी पोकलेन और जेसीबी मशीनों की सहायता से तेजी से किया जा रहा है.
मेराल में भी दिखा उत्साह
दूसरी ओर, मेराल क्षेत्र में भी “आपन सरस्वतिया” अभियान के दूसरे दिन सुबह से ही भारी उत्साह और सरगर्मी देखी गई. वहां बीडीओ सह प्रभारी अंचलाधिकारी यशवंत नायक के नेतृत्व में दो जेसीबी मशीनों की मदद से नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग का काम कराया गया. इस दौरान प्रभारी अंचल निरीक्षक संजीव पांडे और अंचल अमीन द्वारा समय-समय पर कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं जिससे काम पूरी गुणवत्ता के साथ हो सके.
जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी बने अभियान का हिस्सा
मेराल में इस बदलाव की अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मुखिया रामसागर महतो, मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना राम, विधायक प्रतिनिधि डॉ. लालमोहन, पूर्व जिला परिषद सदस्य संजय भगत, समाजसेवी अतहर अली अंसारी, धनंजय चौधरी, अभियंता रोहित कुमार और कृष्ण प्रसाद कुशवाहा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
जनआंदोलन बन चुका है “आपन सरस्वतिया” अभियान : एसडीएम
इस ऐतिहासिक बदलाव और जनसहभागिता पर गर्व जताते हुए एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि आपन सरस्वतिया अभियान अब केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह जनआंदोलन का रूप ले चुका है. गढ़वा और मेराल दोनों क्षेत्रों में लोगों का यह स्वस्फूर्त सहयोग इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब समाज अपनी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए ठान लेता है, तो बड़े से बड़ा बदलाव भी मुमकिन हो जाता है.
लोगों से की महत्वपूर्ण अपील
उन्होंने अभियान में अपना बहुमूल्य समय और सहयोग देने वाले सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों के प्रति दिल से आभार व्यक्त करते हुए साफ किया कि सरस्वतिया नदी की पूर्ण सफाई, डी-सिल्टिंग और इसके मुकम्मल संरक्षण तक यह अभियान बिना रुके निरंतर जारी रहेगा. इसके साथ ही उन्होंने जिले के तमाम सजग नागरिकों से दो बेहद महत्वपूर्ण अपील की हैं. उन्होंने कहा कि लोग नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कचरा न फेंकें और नदी को डंपिंग यार्ड न बनाएं. साथ ही, उन्होंने समाज से अपील की कि यदि कोई भी व्यक्ति नदी को दूषित करता या कचरा फेंकता हुआ पाया जाए, तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को उपलब्ध कराएं, जिससे इस पावन नदी को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने का यह सामूहिक और भगीरथ प्रयास पूरी तरह सफल हो सके.
नदी सिर्फ जलस्रोत नहीं, जीवनरेखा है
आज के दौर में जहां लोग अपने तक सीमित हो रहे हैं, वहां एक प्रशासनिक अधिकारी की पहल पर उमड़ा यह जनसैलाब यह बताने के लिए काफी है कि लोग अब समझ चुके हैं कि नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और मानव अस्तित्व की असली जीवनरेखा है.
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