गढ़वा में सरस्वतिया नदी पुनर्जीवन मुहिम को मिला नया बल, मेदिनीनगर से बढ़े सहयोग के हाथ

Garhwa News: गढ़वा जिले में सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए चल रहा ‘आपन सरस्वतिया’ महाभियान अब जिले की सीमाओं से बाहर भी समर्थन जुटा रहा है. अभियान के 15वें दिन मेदिनीनगर से मिले सहयोग से नदी की सफाई, चौड़ीकरण और डी-सिल्टिंग कार्य को नई गति मिली.

अविनाश की रिपोर्ट 

Garhwa News: गढ़वा की जीवनदायिनी सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू हुआ ‘आपन सरस्वतिया’ महाभियान अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है. जनसहभागिता के इस अनोखे मॉडल की गूंज अब जिले की भौगोलिक सीमाओं को पार कर चुकी है. अभियान के 15वें दिन इस मुहिम को सरहद पार यानी मेदिनीनगर (पलामू) से एक बड़ा और मजबूत सहारा मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि नदियों को बचाने की चिंता किसी एक शहर या जिले की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है.

नदी सफाई अभियान को मिला नया सहयोग 

अभियान का नेतृत्व कर रहे अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने इस व्यापक होते जनआंदोलन की सराहना की. इस नए सहयोग के साथ गढ़वा प्रखंड कार्यालय के सामने स्थित जोबरैया और पिपरा कला के बीच नदी के प्रवाह को मोड़ने और साफ करने का काम युद्ध स्तर पर चला. सोमवार को नदी की सफाई, चौड़ीकरण और डी-सिल्टिंग का पूरा मोर्चा मेदिनीनगर के संत मरियम आवासीय विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव के सौजन्य से संभाला गया. उन्होंने गढ़वा से बाहर होने के बावजूद इस नदी की महत्ता को समझा और सफाई के लिए भारी मशीनों (जेसीबी) की व्यवस्था अपनी ओर से कराई. 

जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत 

एसडीएम संजय कुमार ने कहा जब गढ़वा की भौगोलिक सीमा से बाहर के प्रबुद्ध नागरिक भी इसे अपना अभियान मानकर आगे आते हैं, तो यह इस आंदोलन की सबसे बड़ी जीत है. समाज के विभिन्न वर्गों की यही निस्वार्थ भागीदारी इस अभियान की असली ताकत है. अब सकारात्मक और बड़े परिणाम आने तय हैं. 15 दिन पूरे होने पर यह अभियान अब एक सामाजिक चेतना का रूप ले चुका है. बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे. लोगों ने न केवल श्रमदान किया, बल्कि प्रशासन के सामने संकल्प लिया कि वे भविष्य में नदी क्षेत्र में कचरा या गंदगी नहीं फेंकेंगे और इसे पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखेंगे. एसडीएम ने एक बार फिर जिले और जिले से बाहर के सक्षम नागरिकों, व्यवसायियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से इस पुनीत कार्य में गिलहरी प्रयास करने की अपील की है.

15वें दिन की कार्रवाई: नदी की छाती से हटे बरसों पुराने अवरोध

  • रास्ते के कांटे दूर:- जोबरैया और पिपरा कला के बीच नदी के बीचो-बीच बरसों से गिरे पुराने सूखे-टूटे पेड़, विशाल डालियां और जल प्रवाह को रोकने वाले स्थाई-अस्थाई अवरोधों को मशीनों से उखाड़ फेंका गया.
  • बाढ़ से मिलेगी मुक्ति:- स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इन अवरोधों के कारण हर साल बरसात में पानी रुक जाता था और गाद जमा हो जाती थी. अब रुकावटें हटने से पानी का प्राकृतिक बहाव सुचारू हो गया है.
  • बढ़ा दायरा:- कई संकटापन्न बिंदुओं पर नदी का चौड़ीकरण भी किया गया, जिससे नदी अपने पुराने और मूल स्वरूप में लौट सके.

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लेखक के बारे में

By Priya gupta

प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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