पीयूष तिवारी, गढ़वा एक अप्रैल 1991 को गढ़वा जिला गठन के बाद से अब तक 35 वर्षों में जिले को 35 उपायुक्त मिल चुके हैं. इस दौरान कई उपायुक्तों का लंबा कार्यकाल रहा, वहीं कुछ अधिकारियों का कार्यकाल बेहद संक्षिप्त रहा. हाल में उपायुक्त अनन्य मित्तल को मात्र 33 दिनों के कार्यकाल के बाद ट्रांसफर कर दिया गया है. यह गढ़वा के इतिहास में दूसरा सबसे छोटा उपायुक्त कार्यकाल रहा. अनन्य मित्तल ने 20 अप्रैल 2026 को गढ़वा उपायुक्त के रूप में योगदान दिया था. इससे एक दिन पहले 19 अप्रैल को उनकी पदस्थापना से संबंधित अधिसूचना जारी की गयी थी. उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त दिनेश कुमार यादव से प्रभार ग्रहण किया था. हालांकि करीब 33 दिन बाद ही सरकार ने नया आदेश जारी कर गढ़वा के वर्तमान उपविकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा को गढ़वा का नया उपायुक्त नियुक्त कर दिया. वहीं अनन्य मित्तल का तबादला जेएसएलपीएस में कर दिया गया है.
गढ़वा जिले में सबसे कम समय तक उपायुक्त रहने का रिकॉर्ड आठवें डीसी सियाराम प्रसाद सिन्हा के नाम दर्ज है. उनका दूसरा कार्यकाल 22 जून 1998 से 30 जून 1998 तक रहा. सियाराम प्रसाद सिन्हा तीन बार गढ़वा के डीसी रहे हैं. उनका पहला कार्यकाल तीन मई 1997 से आठ मई 1998 तक रहा. इसके बाद लक्ष्मीकांत को अतिरिक्त प्रभार दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद पुनः सियाराम प्रसाद सिन्हा को डीसी बनाया गया. हालांकि नौ दिनों बाद ही उनकी जगह मिश्रि प्रसाद पासवान को नया डीसी नियुक्त कर दिया गया. बाद में वे तीसरी बार 30 नवंबर 2000 से 15 जून 2001 तक गढ़वा के डीसी रहे. सबसे कम कार्यकाल वाले उपायुक्तों में 26वीं डीसी राजेश्वरी का नाम भी शामिल है, जिनका कार्यकाल 14 फरवरी 2015 से 14 अप्रैल 2015 तक मात्र 60 दिनों का रहा. वहीं 25वें डीसी डॉ मनीष रंजन 29 नवंबर 2014 से 13 फरवरी 2015 तक 77 दिनों तक गढ़वा के डीसी रहे थे.
सबसे लंबा कार्यकाल राजेंद्र प्रसाद सिन्हा के नामगढ़वा में सबसे अधिक समय तक उपायुक्त रहने का रिकॉर्ड 22वें डीसी राजेंद्र प्रसाद सिन्हा के नाम है. उन्होंने 24 जनवरी 2011 से 31 जनवरी 2014 तक लगातार तीन साल सात दिनों तक जिले में सेवा दी. इसके अलावा 28वीं डीसी डॉ नेहा अरोड़ा ने भी लंबा कार्यकाल पूरा किया. वे एक जनवरी 2016 से 31 अगस्त 2018 तक करीब दो साल आठ महीने तक गढ़वा की डीसी रहीं.
चार बार उपविकास आयुक्त के पास रहा डीसी का प्रभारगढ़वा जिला गठन के बाद अब तक चार बार ऐसी स्थिति बनी, जब कुछ दिनों के लिए उपायुक्त का प्रभार उपविकास आयुक्त को सौंपा गया. इनमें लक्ष्मीकांत, टीपी नायक, सुरेंद्र प्रसाद सिंह और उमाशंकर प्रसाद शामिल हैं. लक्ष्मीकांत नौ मई 1998 से 21 जून 1998 तक, टीपी नायक 21 जनवरी 2006 से 29 जनवरी 2006 तक, सुरेंद्र प्रसाद सिंह एक फरवरी 2009 से 16 फरवरी 2009 तक व उमाशंकर प्रसाद एक फरवरी 2014 से 10 फरवरी 2014 तक उपायुक्त प्रभार में रहे.
