गढ़वा के एसडीएम साहब ने जब कॉफी संग घोली मिठास, तो चौकीदारों का छलका 30 साल पुराना दर्द

Coffee with SDM: गढ़वा में एसडीएम संजय कुमार के “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम में चौकीदारों ने पहली बार सम्मान और अपनापन महसूस किया. कॉफी के दौरान ग्रामीण प्रहरियों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं. प्रशासन ने प्रशिक्षण, सुरक्षा और जमीनी स्तर की चुनौतियों के समाधान का भरोसा दिया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गढ़वा से अविनाश सिंह की रिपोर्ट

Coffee with SDM: झारखंड के गढ़वा जिला मुख्यालय में बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासन और ग्रामीण प्रहरियों (चौकीदार-दफादार) के रिश्ते को नई पहचान दे दी. सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार की पहल पर आयोजित “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम में चौकीदार और दफादार न सिर्फ प्रशासनिक बैठक का हिस्सा बने, बल्कि पहली बार खुद को सम्मानित और सुना हुआ महसूस किया. पिछले 30 सालों में ऐसा पहली बार हुआ, जब जिले के चौकीदार और दफादार साहब के सामने बैठे थे. एसडीएम साहब ने कॉफी की चुस्की के साथ बातों की मिठास घोली, तो बुजुर्ग चौकीदारों और दफादारों का 30 साल पुराना दर्द छलक उठा.

भावुक हुए बुजुर्ग चौकीदार

अनुमंडल कार्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में कई बुजुर्ग चौकीदार भावुक हो गए. किसी की आंखें नम थीं तो कोई अपनी पीड़ा और संघर्ष की कहानी सुनाते हुए भर्रा गया. एक चौकीदार ने कहा, “साहब, 30 साल नौकरी हो गई, लेकिन पहली बार किसी एसडीएम ने हमें अपने बराबर बैठाकर कॉफी पिलाई और हमारी समस्याएं सुनीं.”

कॉफी विद एसडीएम बना चर्चा का विषय

एसडीएम संजय कुमार का यह साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशासन और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है. इस बार पूरे अनुमंडल की जगह सिर्फ गढ़वा और डंडा प्रखंड के 35 महिला और पुरुष चौकीदारों को आमंत्रित किया गया था. कार्यक्रम के दौरान सभी चौकीदारों को खुले माहौल में अपनी समस्याएं रखने का अवसर दिया गया. कॉफी की चुस्कियों के बीच चौकीदारों ने वर्षों से दबे दर्द और परेशानियों को खुलकर साझा किया. कई महिला चौकीदारों ने फील्ड में ड्यूटी के दौरान होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को सामने रखा.

प्रशासन की आंख और कान हैं चौकीदार

कार्यक्रम में एसडीएम संजय कुमार ने चौकीदारों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर चौकीदार-दफादार प्रशासन की आंख और कान होते हैं. गांव में होने वाली किसी भी गैरकानूनी गतिविधि, अफवाह या सामाजिक तनाव की सबसे पहले जानकारी इन्हीं के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचती है. उन्होंने चौकीदारों से कहा कि सभी अपने-अपने बीट में सक्रिय रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें. बेहतर कार्य करने वाले चौकीदारों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा. एसडीएम ने कहा कि प्रशासन तभी मजबूत होगा जब जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को सम्मान और भरोसा मिलेगा.

नई नियुक्ति और प्रशिक्षण की जरूरत पर चर्चा

संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि गढ़वा अनुमंडल में हाल ही में 90 नए चौकीदारों की नियुक्ति हुई है, जो फिलहाल परिवीक्षाधीन अवधि में हैं. इन नए चौकीदारों को फील्ड में बेहतर काम करने के लिए व्यावहारिक और विभागीय प्रशिक्षण की जरूरत है. अधिकारियों ने माना कि यदि समय पर सही प्रशिक्षण दिया जाए तो गांव स्तर पर कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है. बैठक में छुट्टी प्रक्रिया, हाजिरी व्यवस्था और विभागीय नियमों की जानकारी भी दी गई.

महिला चौकीदारों ने रखीं अपनी समस्याएं

कार्यक्रम में शामिल महिला चौकीदारों ने भी खुलकर अपनी बात रखी. कांति कुमारी, रामी नाग, रेखा कुमारी, कमला कुमारी और अंजनी कुमारी समेत कई महिला कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को एसडीएम के सामने रखा. महिला चौकीदारों ने सुरक्षा, कार्यस्थल की सुविधाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में काम के दौरान आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया. एसडीएम संजय कुमार ने उनकी समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया.

अफवाह और सोशल मीडिया पर बनी रणनीति

बैठक में गांवों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आपसी विवादों को समय रहते सुलझाने और सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रामक संदेशों को रोकने को लेकर भी चर्चा हुई. एसडीएम ने कहा कि चौकीदार गांव की पहली सूचना प्रणाली हैं. इसलिए किसी भी अफवाह या तनावपूर्ण स्थिति की जानकारी तुरंत प्रशासन तक पहुंचाना जरूरी है. इस मौके पर गढ़वा के अंचलाधिकारी सफी आलम और दो प्रशिक्षु उपसमाहर्ता भी मौजूद रहे. उन्होंने नए और पुराने चौकीदारों को उनके अधिकारों और विभागीय जिम्मेदारियों की जानकारी दी.

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क्या है कॉफी विद एसडीएम कार्यक्रम

एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के अलग-अलग वर्गों और ग्राउंड स्टाफ के साथ सीधा संवाद स्थापित करना है. उन्होंने कहा कि जब प्रशासन सीधे जमीनी कर्मचारियों से बात करता है तो समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और मजबूत बनती है. गढ़वा में हुई यह अनोखी पहल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और चौकीदारों को मिले सम्मान ने प्रशासन की नई कार्यशैली की मिसाल पेश की है.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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