Garhwa News: जन्माष्टमी पर बदला गढ़वा बस स्टैंड का नाम, अब ‘श्री कृष्ण अंतरराज्यीय बस स्टैंड’ से होगी पहचान

गढ़वा के अंतरराज्यीय बस स्टैंड का नाम बदलकर श्री कृष्ण अंतरराज्यीय बस स्टैंड रखा गया है। जन्माष्टमी के अवसर पर नगर परिषद ने इसका विधिवत उद्घाटन किया।

गढ़वा : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर गढ़वा नगर परिषद ने शहर के प्रमुख अंतरराज्यीय बस स्टैंड का नाम बदल दिया है. अब यह बस स्टैंड ‘श्री कृष्ण अंतरराज्यीय बस स्टैंड’ के नाम से जाना जायेगा. शुक्रवार को नगर परिषद अध्यक्ष आशीष कुमार सोनी उर्फ दौलत सोनी ने विधिवत नये नाम का उद्घाटन किया.

बोर्ड ने सर्वसम्मति से पारित किया था प्रस्ताव

नगर परिषद अध्यक्ष ने बताया कि नगर परिषद बोर्ड की बैठक में अंतरराज्यीय बस स्टैंड का नाम बदलकर ‘श्री कृष्ण अंतरराज्यीय बस स्टैंड’ रखने का प्रस्ताव रखा गया था. बोर्ड ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया. इसके बाद जन्माष्टमी के अवसर पर नामकरण किया गया.

अध्यक्ष ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर बस स्टैंड का नामकरण नगर परिषद के लिए विशेष महत्व रखता है. उन्होंने कहा कि शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों को बेहतर पहचान और विशिष्ट नाम देने की दिशा में नगर परिषद लगातार काम कर रही है.

उन्होंने बताया कि गढ़वा का बस स्टैंड प्रमुख यात्री केंद्र है. यहां से झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों के कई शहरों के लिए बसों का परिचालन होता है. ऐसे में नये नाम से बस स्टैंड की अलग पहचान बनेगी.

नगर परिषद की ओर से बताया गया कि अब सरकारी अभिलेखों, नगर परिषद के दस्तावेजों और सार्वजनिक स्तर पर बस स्टैंड का उल्लेख ‘श्री कृष्ण अंतरराज्यीय बस स्टैंड’ के नाम से किया जायेगा. मौके पर नगर परिषद की उपाध्यक्ष, वार्ड पार्षद, कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे.

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By Avinash singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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