केतार से संदीप कुमार की रिपोर्ट
Garhwa News: गढ़वा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक पारिवारिक विवाद और आपराधिक मामले का सीधा असर मासूम बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. केतार प्रखंड क्षेत्र के ताली गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका अमृता विश्वकर्मा के जेल जाने के बाद से केंद्र पर ताला लटका हुआ है. इसके कारण पिछले कई दिनों से केंद्र में नामांकित बच्चों को सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त शिक्षा, पोषण और अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.
पति की संदिग्ध मौत के बाद दर्ज हुआ मामला
यह पूरा मामला एक संदिग्ध मौत से जुड़ा है. 27 मई की रात को सेविका अमृता विश्वकर्मा के पति ऋषभ विश्वकर्मा का शव भवनाथपुर स्थित उनकी वेल्डिंग दुकान में फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला था. सुसाइड के पहले ऋषभ ने एक विडियो शूट किया था, जिसमें उसने अपने मौत के लिए पत्नी अमृता को जिम्मेदार बताया था. इस घटना के बाद मृतक के पिता अवधेश विश्वकर्मा ने अपनी बहू अमृता विश्वकर्मा और उसके मायके वालों पर बेटे की हत्या का गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी. मामले की जांच करते हुए भवनाथपुर पुलिस ने कार्रवाई की और बीते 7 जून को सेविका अमृता विश्वकर्मा समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
जेल जाने से बंद पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र
इधर, सेविका के सलाखों के पीछे जाने के बाद से ताली गांव का आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह बंद है. डिजिटल युग में जहां बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, वहीं इस केंद्र के बंद होने से बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है. बच्चों को न तो पूरक पोषण आहार मिल पा रहा है और न ही खेल-खेल में होने वाली पढ़ाई. इस स्थिति को लेकर अब गांव के अभिभावकों और ग्रामीणों में चिंता साफ देखी जा रही है.
सीडीपीओ ने दिया जल्द समाधान का भरोसा
जब इस गंभीर मामले को लेकर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी नंदजी राम से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस संबंध में हाल ही में सूचना मिली है. उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि मामला संज्ञान में आते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है. संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र को जल्द ही पास के किसी दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र के साथ टैग (जोड़ने) करने की प्रक्रिया की जाएगी. हमारा मकसद यह है कि बच्चों की शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं बाधित न हो और उनके भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो.
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