गढ़वा के खरौंधी में 16.57 करोड़ के 5 पुलों में खामियां - कहीं 25 फीट दरार तो कहीं धंसा एप्रोच, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

खरौंधी में 16.57 करोड़ की लागत से बने पांच पुलों में दरारें और एप्रोच पथ धंसने से निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अभिमन्यु कुमार की रिपोर्ट

गढ़वा. खरौंधी प्रखंड में करीब 16.57 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पांच पुलों की स्थिति ने निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. किसी पुल के दोनों ओर लंबी दरारें हैं, तो कहीं एप्रोच पथ पुल के स्तर से नीचे धंस गया है. एक पुल बनने के बाद भी उसका एप्रोच पथ नहीं बना है, जबकि एक पुल वर्षों बाद भी अधूरा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की इन योजनाओं के निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और विभागीय निगरानी का कितना पालन हुआ.

फुलवारी टोला के पुल में 25 फीट दरार

चंदनी गांव के फुलवारी टोला में डोमनी नदी पर 2.59 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल के दोनों ओर करीब 25-25 फीट लंबी दरार पड़ गयी है. एप्रोच पथ भी पुल के लेवल से नीचे धंस गया है. सवाल है कि पुल और एप्रोच पथ के निर्माण में मिट्टी भराई, कॉम्पैक्शन और बेस तैयार करने के निर्धारित मानकों का पालन हुआ था या नहीं. यदि निर्माण मानकों के अनुरूप था, तो इतनी जल्दी इतनी लंबी दरार कैसे पड़ी.

बसाढ़ घाट 2.56 करोड़ का पुल

बसाढ़ घाट में डोमनी नदी पर 2.56 करोड़ रुपये से बने पुल के दोनों तरफ एप्रोच पथ फट गया है. पुल का लेवल भी एप्रोच पथ से नीचे धंस गया है. ग्रामीणों के अनुसार पुल निर्माण के बाद जलनिकासी बाधित हो गयी और बारिश में सड़क पर करीब 10 फीट पानी जमा हो जाता है.

सवाल है कि पुल की डिजाइन और जलनिकासी व्यवस्था तैयार करते समय प्राकृतिक पानी के बहाव का तकनीकी आकलन किया गया था या नहीं. यदि किया गया था, तो जलनिकासी की व्यवस्था क्यों विफल हुई.

तोरेलावा पुल पर अब तक एप्रोच पथ नहीं

तोरेलावा-सेमरवा पथ में डोमनी नदी पर 4.26 करोड़ रुपये की लागत से पुल बनाया गया है, लेकिन एप्रोच पथ अब तक नहीं बना है. सवाल है कि पुल का निर्माण एप्रोच पथ के बिना पूरा कैसे माना गया और योजना की पूर्णता की तकनीकी जांच किस आधार पर हुई.

सिसरी 2.42 करोड़ के पुल का एप्रोच पथ धंसा

सिसरी गांव में सूर्यमंदिर के पास डोमनी नदी पर बने पुल की लागत करीब 2.42 करोड़ रुपये है. इसका एप्रोच पथ धंस गया है. यह पुल बनखेता, अंधरी, केवाल और भागीडीह टोला को जोड़ता है. सवाल है कि निर्माण पूरा होने के बाद एप्रोच पथ की स्थिरता और गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गयी थी और खामी सामने आने के बाद अब तक सुधार क्यों नहीं हुआ.

राजी पुल वर्षों बाद भी अधूरा

केतार-खरौंधी-कोन मुख्य पथ पर राजी गांव में पंडा नदी पर 4.74 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल अब भी एप्रोच पथ के अभाव में अधूरा है. एप्रोच पथ नहीं बनने से आवागमन बाधित है और ग्रामीण पुराने क्षतिग्रस्त पुल से आवाजाही करने को मजबूर हैं. जमीन मुआवजे का मामला सुलझने के बाद भी एप्रोच पथ का काम पूरा नहीं होना कार्य की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है.

जिम्मेदारी तय करने की जरूरत

पांचों पुलों में सामने आयी खामियों को महज सामान्य टूट-फूट या मरम्मत का मामला मानकर छोड़ना पर्याप्त नहीं होगा. करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बाद यदि पुलों में दरार पड़ रही है, एप्रोच पथ धंस रहे हैं और जलनिकासी व्यवस्था तक विफल हो रही है, तो निर्माण की तकनीकी जांच के साथ जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.

ये भी पढ़ें: गढ़वा : करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन जल निकासी और रखरखाव की व्यवस्था नहीं

मरम्मत कराकर मामला खत्म करने के बजाय

विभाग को प्रत्येक पुल की नींव, निर्माण सामग्री, कंक्रीट की गुणवत्ता, एप्रोच पथ की भराई व कॉम्पैक्शन, पुल-सड़क के लेवल, जलनिकासी डिजाइन और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया की स्वतंत्र तकनीकी जांच करानी चाहिए. जांच में यदि निर्माण एजेंसी, संवेदक या निगरानी से जुड़े स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो सिर्फ मरम्मत कराकर मामला खत्म करने के बजाय जिम्मेदार पक्ष पर कार्रवाई और सरकारी राशि की क्षति की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें: सोन जल समझौते से गढ़वा में जगी सिंचाई की नई उम्मीद. कधवन-इंद्रपुरी परियोजना को मिल सकती है रफ्तार

काम की गुणवत्ता जांचकर भुगतान

सवाल यह भी है कि जिस काम की गुणवत्ता जांचकर भुगतान किया गया, वही काम कुछ समय बाद दरार, धंसाव और जलभराव की समस्या में कैसे बदल गया. इसका जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए. ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि दोष की तकनीकी पहचान, जिम्मेदारी का निर्धारण और समयबद्ध सुधार चाहिए.


फुलवारी टोला मे फटा एप्रोच पथ| Prabhat Khabar Network
सिसरी मे धंसा एप्रोच पथ | Prabhat Khabar Network

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >