दूसरे राज्यों में धान बेचने को मजबूर हैं किसान

दूसरे राज्यों में धान बेचने को मजबूर हैं किसान

आशुतोष कुमार, विशुनपुरा

विशुनपुरा प्रखंड के किसान इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं. सरकारी स्तर पर धान की खरीद प्रक्रिया समय पर शुरू न होने से किसानों को उनकी उपज का उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है. मजबूरन उन्हें अपनी फसल निजी व्यवसायियों और बिचौलियों को काफी कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है. किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूंजी लगा कर धान की खेती की, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण न तो खरीद केंद्र खुले और न ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गयीं. सरकारी खरीद ठप रहने से उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है. किसानों के अनुसार, यदि खरीद शुरू होती तो उन्हें प्रति क्विंटल उचित लाभ मिलता, लेकिन वर्तमान स्थिति में वे समर्थन मूल्य से 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम दाम पर धान बेचने को विवश हैं. स्थिति इतनी खराब है कि प्रतिदिन दर्जनों ट्रक धान विशुनपुरा एवं आसपास के गांवों से लोड होकर दूसरे राज्यों को भेजे जा रहे हैं. किसान अपनी ही उपज का सही मूल्य पाने के लिए भटक रहे हैं, जबकि व्यापारी इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं. किसानों ने विभाग पर समय पर व्यवस्था सुनिश्चित न करने का आरोप लगाते हुए अविलंब खरीद केंद्र शुरू करने, स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा बिचौलियों पर रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकारी खरीद में देरी के कारण प्रखंड का धान बाहर जा रहा है और किसान नुकसान झेलने को मजबूर हैं. इस गंभीर मुद्दे को लेकर किसान संगठन अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं.

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By Akarsh Aniket

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