शहीद नीलांबर-पीतांबर उत्तर कोयल परियोजना (मंडल डैम) से विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से गुरुवार को उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गयी. बैठक में पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) और प्रस्तावों की बिंदुवार समीक्षा की गयी. बैठक में रंका अंचल के विश्रामपुर तथा रमकंडा अंचल के बलीगढ़ में प्रस्तावित पुनर्वास स्थलों पर आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई. उपायुक्त ने सभी विभागों से तैयार प्रस्तावों की प्रगति की जानकारी ली और कार्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को पुनर्वास स्थलों पर सभी आवश्यक सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण और समय पर उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जा सके. बैठक में अपर समाहर्ता विकास कुमार राय, भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रेम लाल सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, जिला कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अर्चना सिन्हा, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे.
विभिन्न विभागों की समीक्षा की
समीक्षा के दौरान लघु सिंचाई प्रमंडल द्वारा सिंचाई व्यवस्था, चेक डैम और तालाब निर्माण, बिजली विभाग द्वारा विद्युत अधोसंरचना, भवन निर्माण विभाग द्वारा स्वास्थ्य उपकेंद्र एवं शहीद नीलांबर-पीतांबर पार्क निर्माण, ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा सड़क निर्माण तथा पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल द्वारा जलापूर्ति व्यवस्था से संबंधित डीपीआर की समीक्षा की गयी. इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय की स्थापना, पंचायती राज विभाग द्वारा सभा भवन और बाजार शेड निर्माण, कल्याण विभाग द्वारा धूमकुड़िया भवन, कब्रिस्तान की घेराबंदी, सरना, मसना एवं हड़गड़ी स्थलों की घेराबंदी, पूजा स्थल और श्मशान घाट निर्माण तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण के प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार किया गया.
प्रस्तावों का दोबारा परीक्षण कर शीघ्र रिपोर्ट भेजने का निर्देशउपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने डीपीआर और प्रस्तावों का एक बार फिर सूक्ष्मता से परीक्षण करें. यदि किसी प्रकार का संशोधन या परिमार्जन आवश्यक हो तो उसे तत्काल पूरा कर शीघ्र विभागीय मुख्यालय को भेजें.
