स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर सख्त हुए डीसी, हर माह होगी मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक

गढ़वा डीसी ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। अवैध क्लिनिकों पर कार्रवाई और मॉनिटरिंग कमिटी की बैठकें अनिवार्य की गई हैं।

गढ़वा: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार को समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने की. इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी और योजनाओं का असर धरातल पर दिखना चाहिए.

अवैध क्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

उपायुक्त ने जिले में संचालित अवैध निजी क्लिनिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर, दवा दुकानों और झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये. उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को प्रखंड विकास पदाधिकारी और थाना प्रभारी के साथ संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि गलत इलाज के कारण किसी मरीज की जान नहीं जानी चाहिए. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

हर महीने होगी मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक

डीसी ने सभी प्रखंडों में गठित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि बैठकों में स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाये.

मातृ-शिशु स्वास्थ्य और टीकाकरण पर जोर

समीक्षा के दौरान गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण, संस्थागत प्रसव और शत-प्रतिशत बच्चों के टीकाकरण को सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये. साथ ही राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन, कुष्ठ नियंत्रण, मलेरिया, सिकल सेल एनीमिया और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग में तेजी लाने को कहा गया. स्क्रीनिंग के बाद चिन्हित मरीजों के नियमित उपचार और फॉलोअप पर भी विशेष जोर दिया गया.

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की भी हुई समीक्षा

बैठक में आयुष्मान भारत, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, ई-संजीवनी और आयुष्मान कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा की गयी. उपायुक्त ने दूर-दराज के ग्रामीणों को ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह उपलब्ध कराने के निर्देश दिये. इसके अलावा सदर अस्पताल में डायलिसिस सेवा और ब्लड बैंक में पर्याप्त रक्त उपलब्ध रखने पर भी जोर दिया गया.

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कैनेडी, सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. माहेरू यामिनी, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. गोविंद सेठ, जिला कुष्ठ पदाधिकारी डॉ. कौशल सहगल, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. पुष्पा सहगल, डीपीएम (स्वास्थ्य) गौरव कुमार समेत सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे.

उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सीधे मानव जीवन से जुड़ा है. ऐसे में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपनी नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी समझें तथा आपसी समन्वय के साथ काम कर हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करें.


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By Avinash singh

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