गढ़वा : करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन जल निकासी और रखरखाव की व्यवस्था नहीं

गढ़वा के नवनिर्मित अंतरराज्यीय बस स्टैंड में पहली बारिश के बाद ही जलजमाव की समस्या सामने आई है, जिससे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

जीतेंद्र सिंह की रिपोर्ट

गढ़वा. गढ़वा के सोनपुरवा स्थित अंतरराज्यीय बस स्टैंड की कहानी करीब तीन दशक पुरानी है. जिला बनने के बाद परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वर्ष 1993 में तत्कालीन उपायुक्त एसके सत्पथी की पहल पर बस स्टैंड की स्थापना हुई थी. करीब तीन दशक बाद इसी बस स्टैंड को आधुनिक और सुविधा संपन्न स्वरूप दिया गया. लेकिन सोमवार, 31 अगस्त 2026 को हुई मूसलधार बारिश ने विकास की इस तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिये. बस स्टैंड परिसर में जलजमाव की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद जल निकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है.

1991 में जिला बना, 1993 में मिला बस स्टैंड

गढ़वा को पलामू से अलग कर वर्ष 1991 में अलग जिला बनाया गया. नया जिला बनने के बाद तेजी से बढ़ते शहर और परिवहन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए बस स्टैंड की आवश्यकता महसूस हुई. इसी क्रम में वर्ष 1993 में तत्कालीन उपायुक्त एसके सत्पथी की पहल पर सोनपुरवा में बस स्टैंड की शुरुआत हुई.

परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र

उस समय यह सिर्फ बसों के ठहराव की जगह नहीं था, बल्कि नये जिले की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. समय के साथ गढ़वा शहर का विस्तार हुआ और बसों तथा यात्रियों की संख्या भी बढ़ती गयी. पुराना बस स्टैंड सुविधाओं के लिहाज से छोटा पड़ने लगा. इसके बाद सोनपुरवा में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक अंतरराज्यीय बस स्टैंड का निर्माण कराया गया.

3 मार्च 2024 को चंपाई सोरेन ने किया उद्घाटन

नवनिर्मित बस स्टैंड का उद्घाटन 3 मार्च 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने किया था. इसी दिन उन्होंने गढ़वा में समाहरणालय भवन, बिरसा मुंडा हेलीपैड पार्क, अंतरराज्यीय बस स्टैंड, फुटबॉल स्टेडियम और टाउन हॉल समेत पांच बड़ी योजनाओं का उद्घाटन किया था. बस स्टैंड सहित अन्य निर्माण तत्कालीन मंत्री मिथिलेश ठाकुर की सक्रिय पहल से हुआ था.

एक साथ 20 बसों के ठहराव की व्यवस्था

नये बस स्टैंड में एक साथ 20 बसों के ठहराव की व्यवस्था की गयी. मुख्य भवन के अलावा टिकट काउंटर और पूछताछ कार्यालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की गयीं. तीन राज्यों की सीमा से जुड़े गढ़वा में इस बस स्टैंड से बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई इलाकों के यात्रियों को लाभ मिलना शुरू हुआ.

31 अगस्त की बारिश ने पूछा बड़ा सवाल

जिस बस स्टैंड को आधुनिक और सुविधा संपन्न बनाकर गढ़वा की बदलती तस्वीर का प्रतीक बताया गया था, सोमवार की मूसलधार बारिश ने उसी के सामने जल निकासी की चुनौती खड़ी कर दी. बारिश के बाद परिसर में पानी जमा होने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने.

बारिश में बस स्टैंड में भर जाता है पानी

लोगों ने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन बारिश के पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था कितनी मजबूत है. सवाल सिर्फ एक दिन के जलजमाव का नहीं है. सवाल यह भी है कि यदि सामान्य से अधिक बारिश में बस स्टैंड का परिसर पानी से भर जाता है, तो यात्रियों की सुविधा और बसों के संचालन की व्यवस्था कितनी सुरक्षित और टिकाऊ है.

सुंदर भवन से आगे जरूरी है स्थायी व्यवस्था

गढ़वा का अंतरराज्यीय बस स्टैंड जिले के परिवहन का महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं. ऐसे में जलजमाव यात्रियों के लिए परेशानी के साथ-साथ बसों के परिचालन और परिसर की स्वच्छता पर भी असर डाल सकता है.

विकास सिर्फ भवन और सौंदर्यीकरण तक सीमित

तीन दशक में गढ़वा के बस स्टैंड ने लंबा सफर तय किया है. वर्ष 1993 में शुरू हुआ बस स्टैंड 2024 में आधुनिक अंतरराज्यीय बस स्टैंड के रूप में सामने आया. अब 31 अगस्त 2026 की बारिश ने नया सवाल खड़ा कर दिया है. क्या बस स्टैंड का विकास सिर्फ भवन और सौंदर्यीकरण तक सीमित रहेगा या जल निकासी और रखरखाव की स्थायी व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी.

ये भी पढ़ें: सोन जल समझौते से गढ़वा में जगी सिंचाई की नई उम्मीद. कधवन-इंद्रपुरी परियोजना को मिल सकती है रफ्तार

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर उठे सवालों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अब जरूरत सिर्फ जलजमाव हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाने की है, ताकि अगली तेज बारिश में यात्रियों को बस स्टैंड परिसर में पानी के बीच से होकर न गुजरना पड़े.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Avinash singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >