नामधारी कॉलेज में पीजी बंद होने से बढ़ेगा गरीब विद्यार्थियों का बोझ : जेसीएम

गढ़वा के नामधारी महाविद्यालय में पीजी की पढ़ाई बंद होने के मुद्दे पर झारखंड छात्र मोर्चा (जेसीएम) ने चिंता जताई है. जेसीएम का दावा है कि इससे गरीब छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं.

गढ़वा. नामधारी महाविद्यालय में पीजी की पढ़ाई बंद होने के मुद्दे पर झारखंड छात्र मोर्चा की जिला कमेटी ने पत्रकार वार्ता की. जिलाध्यक्ष निशांत चतुर्वेदी ने भाजपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीजी की पढ़ाई बंद होने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के कारण सिंगल डिग्री कॉलेजों में पीजी और शोध की पढ़ाई को लेकर बदलाव किया गया है.

NEP के प्रावधानों का दिया हवाला

निशांत चतुर्वेदी ने एनइपी के क्लॉज 10.2 और 10.3 का हवाला देते हुए कहा कि बड़े बहुविषयक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था पर जोर दिया गया है. उनके अनुसार, इससे जिला स्तर के कॉलेजों में पीजी और शोध की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. हालांकि, एनइपी 2020 के संबंधित प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों को बड़े बहुविषयक विश्वविद्यालयों और संस्थानों की दिशा में विकसित करने की बात करते हैं.

गरीब विद्यार्थियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

निशांत ने कहा कि यदि भाजपा विद्यार्थियों के हित में आवाज उठाना चाहती है, तो उसे केंद्र सरकार की शिक्षा नीति के खिलाफ भी आवाज उठानी चाहिए. उन्होंने कहा कि गढ़वा जैसे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए जिला मुख्यालय में पीजी की सुविधा जरूरी है. पढ़ाई बंद होने से विद्यार्थियों को मेदिनीनगर या रांची जाना पड़ेगा, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा.

उन्होंने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और पीएम-उषा फंड को लेकर भी सवाल उठाये. जेसीएम ने कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से मामला रखा जायेगा.

मौके पर जिला सचिव विकास चंद्रवंशी, कोषाध्यक्ष सूरज तिवारी और सौरभ कुमार सिंह मौजूद थे.

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By Avinash Singh

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