विजय सिंह, भवनाथपुर भवनाथपुर से बरवाड़ीह तक पैसेंजर ट्रेन चलाने का चार दशक पुराना सपना अब खतरे में है. पिछले पांच वर्षों से रेलवे लाइन में लगे कीमती सामान, क्लिप और गिट्टियों की चोरी लगातार हो रही है. भवनाथपुर सेल प्रबंधन ने घाघरा और तुलसीदामर खदान से पत्थरों को बोकारो, भिलाई और राउरकेला भेजने के लिए 34 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछायी थी. 1990 में क्रशिंग प्लांट बंद और 2020 में डोलोमाइट खदान बंद होने के बाद मालगाड़ियों का परिचालन ठप हो गया. मालगाड़ी बंद होने के बाद पूरी लाइन बेकार हो गयी, जिसके बाद वर्ष 1985 से स्थानीय लोग इसे बरवाड़ीह से जोड़कर पैसेंजर ट्रेन चलाने की मांग कर रहे हैं. रेलवे ट्रैक का उपयोग नहीं होने से यहां चोर बेखौफ होकर चोरी कर रहें और ट्रैक के कीमती सामानों पर हाथ साफ कर रहें
सीआइएसएफ की विदाई के बाद से सुरक्षा व्यवस्था शून्य
वर्ष 2025 में क्रशिंग प्लांट की नीलामी और सीआइएसएफ की विदाई के बाद रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा व्यवस्था शून्य हो गयी, जिससे चोर बेखौफ होकर कीमती सामग्रियों की चोरी कर रहे हैं. बुद्धिजीवियों का कहना है कि जब रेल लाइन ही नहीं बचेगी, पैसेंजर ट्रेन की मांग भी व्यर्थ साबित होगी. स्थानीय लोग जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.