चिनियां में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पकड़े गए प्रतिबंधित उत्पाद, ग्रामीण बाजारों में स्टिंग ड्रिंक और फॉर्च्यून ऑयल की बिक्री पर सवाल

चिनियां में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में दुकानों से प्रतिबंधित स्टिंग एनर्जी ड्रिंक और अन्य उत्पाद हटवाए गए। ग्रामीण बाजारों में सुरक्षा पर उठे सवाल।

चिनियां से महमूद अंसारी की रिपोर्ट

चिनियां (गढ़वा). गांव-कस्बों की छोटी दुकानों तक भी ऐसे खाद्य उत्पाद पहुंच रहे हैं, जिनकी बिक्री या भंडारण पर रोक है. चिनियां में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान दो-तीन दुकानों में प्रतिबंधित उत्पाद मिलने के बाद ग्रामीण बाजार में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं. जांच के दौरान दुकानों से स्टिंग एनर्जी ड्रिंक और फॉर्चून सोया रिफाइंड ऑयल जैसे उत्पाद मिले. विभाग की टीम ने इन उत्पादों को तत्काल दुकानों से हटवा दिया.

दुकान से सामान हटा, लेकिन सवाल बरकरार

कार्रवाई के बाद दुकानों से प्रतिबंधित उत्पाद हटा दिये गये, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन उत्पादों की बिक्री और भंडारण पर रोक है, वे ग्रामीण दुकानों तक पहुंच कैसे रहे हैं. खासकर एनर्जी ड्रिंक जैसे उत्पादों का दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचना यह बताता है कि निगरानी व्यवस्था को केवल बड़े बाजारों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है.

आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचना जरूरी

खाद्य सुरक्षा विभाग को यह भी पता लगाने की जरूरत है कि ऐसे उत्पाद दुकानदारों तक कौन पहुंचा रहा है और इनकी आपूर्ति कहां से हो रही है. सिर्फ दुकानों से सामान हटवा देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. प्रतिबंधित उत्पादों के स्रोत और पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जांच कर कार्रवाई की जाये, तभी इनकी बिक्री पर प्रभावी रोक लग सकती है.

नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी रोहित कुमार ने दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाये गये नियमों व विनियमों के अनुसार कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने खाद्य कारोबारियों से नियमों का पालन करने और प्रतिबंधित या मानकों के विपरीत उत्पादों की बिक्री नहीं करने की अपील की.

ग्रामीण बाजारों में बढ़ानी होगी निगरानी

चिनियां में हुई कार्रवाई ने ग्रामीण इलाकों में खाद्य उत्पादों की नियमित जांच की जरूरत को सामने ला दिया है. यदि दूरदराज की दुकानों तक विभाग की निगरानी नहीं पहुंची, तो प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री दोबारा शुरू होने की आशंका बनी रहेगी.

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प्रतिबंधित उत्पाद ग्रामीण बाजार तक

ऐसे में नियमित जांच के साथ-साथ उत्पादों के आपूर्ति स्रोत की पड़ताल और दोषी कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. चिनियां की यह कार्रवाई केवल दो-तीन दुकानों तक सीमित मामला नहीं है. यह सवाल भी उठाती है कि प्रतिबंधित उत्पाद ग्रामीण बाजार तक पहुंचने से पहले निगरानी तंत्र की नजर से कैसे बच गये.

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By Avinash singh

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