एसडीएम न्यायालय में वर्ष 2025 में 582 वादों का हुआ निस्तारण

पारिवारिक भूमि विवाद आपसी सहमति से सुलझाने की अपील

By Akarsh Aniket | January 15, 2026 9:41 PM

पारिवारिक भूमि विवाद आपसी सहमति से सुलझाने की अपील एसडीएम ने कहा- जमीन से कहीं अधिक कीमती हैं खून के रिश्ते प्रतिनिधि, गढ़वा गढ़वा सदर अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में बीते कैलेंडर वर्ष (2025) के दौरान कुल 582 मामलों का सफल निस्तारण किया गया. इन मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126, 163, 164 व 166 से संबंधित प्रकरणों के अलावा विविध वाद, पब्लिक न्यूसेंस, अतिक्रमण, बेदखली वाद एवं नीलाम पत्र वाद शामिल हैं. इसके अतिरिक्त अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार ने सगे रक्त संबंधियों के बीच उत्पन्न कई मामलों में मध्यस्थता के माध्यम से आपसी समझौता कराते हुए उन्हें लोक अदालत के जरिये निस्तारित कराया. एसडीएम ने भावुक अपील करते हुए कहा कि जमीन से कहीं अधिक कीमती रिश्ते होते हैं. थोड़ी समझदारी, संवाद और त्याग से घर के भीतर ही विवाद सुलझाये जा सकते हैं. इससे न केवल धन और समय की बचत होती है, बल्कि परिवार की खुशियां और सामाजिक सौहार्द भी बना रहता है. उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि छोटे एवं पारिवारिक भूमि विवादों के समाधान के लिए पंचायत, मध्यस्थता और आपसी सहमति का रास्ता अपनाएं और अनावश्यक रूप से न्यायालयीन प्रक्रिया में न उलझें. छोटे भूमि विवाद न्यायालय तक न लाने की अपील एसडीएम संजय कुमार ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि छोटे-मोटे भूमि विवाद, विशेषकर पारिवारिक आपसी मतभेदों को आपसी संवाद, समझौते और सहमति से सुलझाने का प्रयास करें तथा ऐसे मामलों को न्यायालय तक लाने से बचें. उन्होंने कहा कि जब कोई मामला न्यायालय में दाखिल होता है, तो वह वर्षों तक चलता रहता है. इस दौरान भाई-बहन, पिता-पुत्र, माता-पुत्र, दादा-दादी और पूरे परिवार के रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है. न्यायालयीन प्रक्रिया से बढ़ता है आर्थिक और सामाजिक नुकसान एसडीएम ने कहा कि आज संयुक्त परिवार पहले ही संकट के दौर से गुजर रहे हैं और भूमि विवाद उनके अस्तित्व पर और बड़ा संकट खड़ा कर देते हैं. न्यायालयीन प्रक्रिया में दोनों पक्षों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और बहुमूल्य समय भी नष्ट होता है. इतना ही नहीं, निर्णय आने के बाद भी अपील की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे विवाद समाप्त होने के बजाय लगातार चलता रहता है.

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