सरहुल पर्व पूरे साल की खुशियों की शुरुआत है

डीसी, एसपी, डीडीसी व प्रशिक्षु आइपीएस मांदर की थाप पर जमकर थिरके वनवासी कल्याण केंद्र ने जिला मुख्यालय में जुलूस निकाला गढ़वा : सरहुल का पर्व पूरे गढ़वा जिले में हर्ष व उल्लास के साथ मनाया गया़ सरहुल के अवसर पर आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक तरीके से नृत्य एवं संगीत के साथ सारी समस्याओं […]

डीसी, एसपी, डीडीसी व प्रशिक्षु आइपीएस मांदर की थाप पर जमकर थिरके

वनवासी कल्याण केंद्र ने जिला मुख्यालय में जुलूस निकाला
गढ़वा : सरहुल का पर्व पूरे गढ़वा जिले में हर्ष व उल्लास के साथ मनाया गया़ सरहुल के अवसर पर आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक तरीके से नृत्य एवं संगीत के साथ सारी समस्याओं को भूलते हुए दिनभर उल्लास में डूबे नजर आये. आदिवासियों के इस पर्व में जिले के अधिकारी व विभिन्न राजनीतिक दल के नेता भी शामिल हुए.
स्थानीय पुलिस लाइन में आयोजित सरहुल उत्सव में उपायुक्त हर्ष मंगला एवं उपविकास आयुक्त नमन प्रियेश लकड़ा जहां मांदर बजाते नजर आये, वहीं पुलिस अधीक्षक शिवानी तिवारी एवं प्रशिक्षु आइपीएस वंदिता राणा आदिवासी महिलाओं के साथ नृत्य करती दिखी.
पुलिस लाइन से मांदर के थाप एवं नृत्य के साथ जुलूस निकला , जो रंका मोड़ पहुंचकर रामलला मंदिर परिसर से निकले जुलूस के साथ मिलान किया़. इसके पूर्व रंका मोड़ पर काफी देर तक लोगों ने नृत्य का आनंद लिया.
रामलला मंदिर परिसर में सरहुल के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनुषांगिक संगठन वनवासी कल्याण केंद्र द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.
कार्यक्रम की शुरुआत कलश व झंडा स्थापना कर पाहन द्वारा प्रकृति पूजा और धरती माता की वंदना से की गयी. बिरबंधा, चटनियां, कुशमाहा, दलेली, बरवाही, तिलदाग, बगिया आदि स्थानों से आये सैकड़ो महिलाओं ने सामूहिक पूजा की. इस अवसर पर पाहन ने सरहुल पर्व पर प्रकाश डाला गया. पाहन ने लोगों को बताया कि चैत्र शुक्ल तृतिया को अपना यह पर्व मनाया जाता है. यह पर्व नये साल के शुरुआत का प्रतीक और धरती माता को समर्पित है यह पर्व.
पपाहन ने कहा कि इस समय प्रकृति चरम पर होती है तथा फसल से घर एवं फल-फूल से जंगल भरा रहता है. उन्होंने कहा कि ऐसा सभी मानते हैं कि प्रकृति किसी को भूखा नहीं रहने देगी. इसीलिए इस त्योहार के दौरान प्रकृति की पूजा की जाती है. उल्लेखनीय है कि इस त्योहार में साल के वृक्ष का काफी महत्व है. आदिवासी जन जीवन में साल के पेड़ की काफी महत्ता है. इसकी पत्ती, टहनी, डालियां, तने, छाल, फल आदि सब कुछ प्रयोग में लाये जाते हैं. पत्तियों का प्रयोग पत्तल दोना, पोटली आदि बनाने में होता है. इनके बिना आदिवासी जन- जीवन की कल्पना करना असंभव है.
जन्म से लेकर मृत्यु के बाद भी साल के वृक्ष का विशेष स्थान है और साल का पेड़ आदिवसियों के लिए सुरक्षा, शांति एवं खुशहाल जीवन का प्रतीक माना गया है. इस मौके पर भाजपा नेता अलखनाथ पांडेय, रामबेलाश केसरी, मोहन सिंह, प्रीतम गौड़ के अलावे कार्यक्रम को सफल बनाने में वनवासी कल्याण केंद्र के जिला संगठन मंत्री सुमन उरांव, बीरेंद्र उरांव, प्रेम उरांव, मुखलाल उरांव, राकेश उरांव, प्रदीप उरांव, विजय उरांव, सुखदेव उरांव, पाहन सुरेंद्र उरांव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सेवा प्रमुख अनिल कुमार का नाम शामिल है़.

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