संवाददाता, गालूडीह
पूर्वी सिंहभूम जिले के दारीसाई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आर्य प्रोजेक्ट के तहत मशरूम की खेती को लेकर 25 महिला किसानों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उन्हें मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना है. प्रशिक्षण के दूसरे दिन किसानों को मशरूम की बीज उत्पादन प्रक्रिया, खाद तैयार करने, फसल प्रबंधन और आवश्यक उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गयी. कृषि वैज्ञानिक डॉ सीमा सिंह ने बताया कि मशरूम उगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पुआल और मशरूम के बीज होते हैं. मशरूम उत्पादन का सही समय आमतौर पर अक्तूबर से मार्च के बीच होता है. हालांकि गर्मी के मौसम को छोड़कर सालों भर आप मशरूम उगा सकते हैं. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है. मौके पर सुरेंद्र सिंह मुंडा, विद्या कुशवाहा, मनोज हेंब्रम, माला रानी भकत समेत अनेक किसान उपस्थित थे.कैसे तैयार होता है मशरूम
बताया कि मशरूम उगाने के लिए सबसे पहले पुआल को अच्छी तरह से साफ करना होगा. इसके लिए गर्म पानी पुआल के उपर डालें और अच्छी तरह से साफ कर लें. इसके बाद इसे एक पानी से भरी हुई बाल्टी में डाल कर उसके उपर कंबल ढक दें. थोड़ी देर बाद पुआल को पानी से बाहर निकालें और रात भर सूखने के लिए छोड़ दें. अगली सुबह मशरूम के बीज को पुआल में अच्छी तरह मिला लें. फिर पुआल को प्लास्टिक बैग के अंदर डाल दें. अब बैग को इस तरह बंद करें कि उसमें नमी नहीं आ सके. फिर बैग में 10-15 छेद कर लें. अब इन बैगों को एक अंधेरे कमरे में तकरीबन 20 दिनों के लिए रख दें. 20 दिनों बाद बैग को कमरे से निकालें. किसी ऐसी जगह पर रखें, जहां सूरज की हल्की रोशनी पड़े. इसे नमी देने के लिए पानी का रोजाना स्प्रे करते रहें. कुछ ही दिनों में आपके बैग से मशरूम उगने लगेगा. मशरूम की खेती किसानों के लिए लाभदायक व्यवसाय बन सकती है. इससे न केवल आमदनी बढ़ेगी, बल्कि कृषि अपशिष्ट का भी सही उपयोग होगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
