घाटशिला. घाटशिला प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी विद्यालयों में जलमीनारें लंबे समय से हाथी का दांत साबित हो रही हैं. मरम्मत के अभाव में जलमीनारें बंद पड़ी हैं, जिससे भीषण गर्मी की आहट के बीच स्कूली बच्चों और शिक्षकों को पेयजल के लिए भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है. विद्यालय प्रबंधनों का कहना है कि बीआरसी कार्यालय, पंचायत और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित शिकायत दी गयी है, लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं हुआ. ग्रामीणों और अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि समय रहते मरम्मत नहीं करायी गयी, तो गर्मी में स्थिति और भयावह हो जायेगी. अभिभावकों और ग्रामीणों ने शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है.
इन स्कूलों में स्थिति गंभीर
– दीघा उउवि : यहां काफी समय से जल मीनार बंद है. ग्रामीण विधायक को भी सूचना दे चुके हैं, पर स्थिति जस की तस है.– पुनगोड़ा उउवि: पंचायत निधि से लगी मीनार खराब है. बच्चों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है. – तेतलाकोचा प्रावि: पिछले 6 महीनों से जल आपूर्ति ठप है. प्रभारी एचएम ने बताया कि विभाग को सूचना देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
– सरजामडीह प्रावि : यहां भी मीनार खराब है. शिक्षक किसी तरह पास के कुएं के पानी से मिड-डे मील तैयार कर रहे हैं.पायरागुड़ी में पेयजल संकट, दूरदराज से लाते हैं ग्रामीण
गालूडीह. बड़ाकुर्शी पंचायत के पायरागुड़ी गांव में सोलर जलमीनार का सिस्टम पिछले कई महीनों से खराब है. इसके कारण ग्रामीणों और राहगीरों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जलापूर्ति का एकमात्र साधन यही जलमीनार थी. रखरखाव की कमी और तकनीकी खराबी की सूचना के बावजूद जनप्रतिनिधियों और विभाग ने अब तक कोई सुध नहीं ली है. वर्तमान में ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज भटकना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी बढ़ने से पहले सोलर जलमीनार को जल्द से जल्द ठीक कराया जाये.
