East Singhbhum News : 4 गांवों के लोगों ने माइंस गेट जाम किया शाम को बनी सहमति, दिनभर काम बाधित
दो दौर की वार्ता के बाद सुरदा माइंस गेट जाम आंदोलन समाप्त
By ATUL PATHAK | Updated at :
मुसाबनी. सुरदा माइंस लीज क्षेत्र की चार ग्राम सभाओं और वन अधिकार समिति ने नियुक्तियों में मनमानी का आरोप लगाते हुए गुरुवार को माइंस के मुख्य गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया. आंदोलनकारियों ने सुबह की पाली से गेट जाम कर दिया, जिससे माइंस के शाफ्ट थ्री और फोर में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा. वहीं, शाम को प्रबंधन और ग्राम सभाओं के बीच हुई दो दौर की लंबी वार्ता में सहमति बनने के बाद आंदोलनकारियों ने गेट जाम वापस ले लिया. सुरदा माइंस में दोपहर की पाली के मजदूर करीब चार घंटे विलंब से शाम को ड्यूटी पर गये.
दो दौर की वार्ता के बाद निकला समाधान
गतिरोध सुलझाने के लिए सुरदा प्रशासनिक भवन में प्रबंधन और ग्राम सभा के प्रतिनिधियों के बीच दो चरणों में वार्ता हुई. पहला दौर में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चली वार्ता बेनतीजा रही. दूसरा दौर में दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चली बैठक में आखिरकार सहमति बनी.
प्रबंधन ने मानी गलती, दिया आश्वासन
बैठक में एचसीएल प्रबंधन ने स्वीकार किया कि पूर्व में कुछ बहालियां बिना ग्राम सभा की अनुमति के की गयी थीं. प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि अब से बहाली प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ ग्राम सभा को सूचित कर की जायेगी. समझौते के तहत लीज क्षेत्र की 5 ग्राम सभाओं से 7-7 लोगों (कुल 35) की सूची मांगी गयी है, जिनकी बहाली अगले कुछ दिनों में सुनिश्चित की जायेगी. वार्ता में एचसीएल की ओर से जीएम प्रोजेक्ट दीपक कुमार श्रीवास्तव, सुरदा माइंस के वरीय प्रबंधक अमरेंद्र कुमार, एचआर प्रबंधक अर्जुन लोहारा, ग्राम सभा की ओर से सुरदा के ग्राम प्रधान लखन टुडू, तांबाजुड़ी के ग्राम प्रधान फुरमाल टुडू, पाथरगोडा के दिलीप हांसदा, बेनासोल के ग्राम प्रधान पोरेश मुर्मू, फॉरेस्ट ब्लॉक वन अधिकार समिति के अध्यक्ष महेश्वर हांसदा, पाथरगोड़ा वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अमर सिंह बांनरा, बेनासोल के कासू बास्के, सुरदा वनाधिकार समिति के सचिव दुलाल टुडू सहित माझो किस्कू, रविंद्र राज, कमलकांत भट्टाचार्य, चंदू टुडू आदि ने भाग लिया. आंदोलन में शामिल पाथरगोड़ा, बेनासोल, तांबाजुड़ी और सुरदा ग्राम सभा के ग्राम प्रधानों व ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन ग्राम सभा को सूचना दिये बिना चोरी-छिपे बाहरी लोगों की बहाली कर रहा है. ग्रामीणों ने मांग की है कि इन नियुक्तियों पर तत्काल रोक लगायी जाये और स्थानीय ग्राम सभाओं को विश्वास में लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाये. गेट जाम के कारण अधिकारियों और बाहरी कर्मचारियों को माइंस परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया. सुबह की पाली में कुछ मजदूर माइंस के अंदर प्रवेश कर चुके थे, लेकिन आंदोलन तेज होने के कारण दोपहर की पाली में एक भी कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं जा सका. इसके चलते माइंस के भीतर उत्पादन और रखरखाव का कार्य पूरी तरह ठप रहा.