East Singhbhum News : मानदेय के लिए रसोइयों का ''''आर-पार'''' का ऐलान, 18 से ठप रहेगा मध्याह्न भोजन

बीआरसी में सौंपा ज्ञापन, 19 फरवरी को विस का घेराव करेंगी महिलाएं

बहरागोड़ा.

अपनी लंबित मांगों और उपेक्षा से नाराज बहरागोड़ा प्रखंड की रसोइयों, संयोजिकाओं और अध्यक्षों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. रविवार को नेताजी शिशु उद्यान में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में निर्णय लिया गया कि 18 फरवरी से पूरे प्रखंड में उग्र आंदोलन शुरू किया जायेगा. इस दौरान सरकारी और अल्पसंख्यक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन पूरी तरह ठप कर दी जायेगी.

21 वर्षों की सेवा, फिर भी खाली हाथ

बैठक में प्रदेश विद्यालय रसोइया संयोजिका संघ की अध्यक्ष ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाएं पिछले 21 वर्षों से स्कूलों में सेवा दे रही हैं, पर संयोजिका और अध्यक्ष को आज तक एक रुपया मानदेय नहीं मिला. रसोइयों को मात्र 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जो आज की महंगाई में ऊंट के मुंह में जीरा के समान है. 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर बिना किसी पेंशन या स्थायी नियमावली के उन्हें सेवा से हटा दिया जा रहा है.

19 फरवरी को विस के समक्ष विराट प्रदर्शन :

18 फरवरी से पूरे राज्य के विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जायेगी. 19 फरवरी को झारखंड विधानसभा के समक्ष ””अधिकार महासभा”” और विराट प्रदर्शन किया जायेगा. इसमें राज्य भर की हजारों महिलाएं शामिल होंगी. बैठक के बाद बीआरसी केंद्र में ज्ञापन सौंपा गया. इस मौके पर संघ की कई सदस्य और स्थानीय रसोइया मौजूद रहीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है.

मुख्य मांगें

– न्यूनतम वेतन लागू किया जाये.

– संयोजिका और अध्यक्ष के लिए निश्चित मानदेय की व्यवस्था.

– प्रतिवर्ष दो साड़ी सेट उपलब्ध करायी जाये.

– 60 वर्ष की बाध्यता समाप्त कर पेंशन इपीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ.

– 10 लाख रुपये का जीवन बीमा और आश्रितों को मुआवजा.

डुमरिया में रसोइया संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी

डुमरिया. डुमरिया प्रखंड के स्वर्गछिड़ा विद्यालय में रविवार को सात सूत्री मांगों को लेकर रसोइया संघ की बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता रानी मुर्मू ने की. रसोइयों ने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी को स्थायी किया जाये. सभी रसोइयों को न्यूनतम वेतन दिया जाये. रसोइयों को पेंशन स्कीम से जोड़ा जाये एवं एपीएफ से जोड़कर पीएफ काटा जाये. काम के दौरान चोटिल या जल जाने पर रसोइया को समुचित इलाज कराते हुए क्षतिपूर्ति दी जाये. मौत होने पर आश्रितों की सहायता के लिए 10 लाख रुपये का नि:शुल्क बीमा दिया जाये. कार्यकाल में मौत होने पर 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर तक आश्रितों को ही काम में लिया जाये. प्रत्येक वर्ष साल में दो साड़ी सेट दिया जाये. इस मौके पर जमुना मुर्मू, मेहदी हांसदा, बासी किस्कु, छीता हांसदा, हिमानी सोरेन, काजल माझी, कुनी पूर्ति, माही सोरेन, काजल माझी, नमिता गोप, पार्वती हेम्ब्रम के साथ काफी संख्या में रसोइया मौजूद थी.

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लेखक के बारे में

Author: ATUL PATHAK

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