घाटशिला. स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोइयों की हड़ताल का असर घाटशिला प्रखंड में मिला-जुला देखने को मिल रहा है. इस आंदोलन के कारण कुछ विद्यालयों में भोजन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि कई स्कूलों में रसोइयों ने काम जारी रखा है. प्रखंड मुख्यालय स्थित कुछ विद्यालयों में रसोइयों ने बताया कि उन्हें हड़ताल की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, इसलिए वे नियमित रूप से खाना बना रही हैं. विद्यालय प्रधानों का भी कहना है कि बच्चों के पोषण और पढ़ाई में बाधा न आये, इसलिए काम को सुचारू रखा गया है. इसके उलट, चेंगजोड़ा गहनडीह मध्य विद्यालय में हड़ताल का स्पष्ट असर देखने को मिला, जहां रसोइयों के नहीं पहुंचने के कारण चूल्हे नहीं जले और बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी.
आंशिक हड़ताल से असमंजस की स्थिति:
हीरागंज मध्य विद्यालय की प्रधानाध्यापिका भारती महतो ने बताया कि उनके विद्यालय में स्थिति कुछ अलग है. यहां कार्यरत दो रसोइयों में से एक काम पर पहुंची है, जबकि दूसरी हड़ताल के समर्थन में अनुपस्थित है. उन्होंने आशंका जतायी कि यदि दोनों रसोइया हड़ताल पर चली जाती हैं, तो मध्याह्न भोजन योजना को सुचारू रखना बड़ी चुनौती होगी.
रसोइया की टीम घेराव करने रांची रवाना
धालभूमगढ़. अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन गुरुवार को प्रखंड के 81 स्कूलों की रसोइया एवं संयोजिकाएं रांची रवाना हुईं. बनवासी सोरेन के नेतृत्व में भारी संख्या में महिलाएं धालभूमगढ़ चौक पर एकत्रित हुईं और नारेबाजी करते हुए बस से राजभवन घेराव के लिए निकलीं. रसोइयों के लिए न्यूनतम वेतन और 10 लाख रुपये का बीमा सुनिश्चित करना, एप्रन, साड़ी उपलब्ध कराना और संयोजिकाओं को भी नियमित मानदेय देना, राज्य स्तरीय संघ के आह्वान पर सात सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग होगी. इस दौरान मालती मुर्मू, सरस्वती सोरेन, प्रमिला गोप, दीपाली महतो, रत्न महतो और अंजना महतो समेत बड़ी संख्या में रसोइया शामिल थीं. बनवासी सोरेन ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा.