East Singhbhum News : झारखंड-बंगाल सीमा के जंगल में भालू दिखने से विभाग उत्साहित, जैव विविधता के सुखद संकेत

वनस्पतियों और प्राकृतिक झरनों की बहुलता से वन्य जीवों के लिए अनुकूल वातावरण

घाटशिला. झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर घने जंगलों में वन्य प्राणियों की सक्रियता बढ़ गयी है. हाल में पश्चिम बंगाल के बेलपहाड़ी (भुलावेदा) जंगल में वन विभाग के ट्रैप कैमरे में एक भालू की तस्वीर कैद हुई है. पिछले साल क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के प्रमाण मिले थे, जिसके बाद सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गयी थी. पिछले साल अप्रैल में बंगाल के बांसपहाड़ी और भुलावेदा के जंगलों में दो भालुओं की गतिविधि की सूचना मिली थी. जून में कांकड़ाझोर से सटे जंगल में ट्रैप कैमरे में भालू की तस्वीर कैद हुई थी. पिछले साल गर्मी में एक हिरण जंगल से भटक कर घाटशिला के दामपाड़ा क्षेत्र पहुंचा था.

वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जंगली जानवरों की नियमित उपस्थिति इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है. पिछले साल बाघ की आवाजाही की खबरों के बाद कानीमोहुली (झारखंड) से सटे बंगाल के कांकड़ाझोर और भुलावेदा में दर्जनों ट्रैप कैमरे लगाये गये थे. भालू की नयी तस्वीर ने इस बात की पुष्टि की है कि ये घने जंगल अब वन्यजीवों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन रहे हैं.

सुरक्षित ठिकाना बने पहाड़ और सुरंगें :

झारखंड-बंगाल सीमा पर ऊंचे पहाड़, घने जंगल, प्राकृतिक गुफाएं और पहाड़ी झरने वन्यजीवों के लिए आदर्श आवास प्रदान करते हैं. झारखंड के झाटीझरना, टेरापानी, बासाडेरा और बंगाल के कांकड़ाझोर, भुलावेदा जैसे इलाकों में वनस्पतियों की विविधता भी बढ़ी है. वन विभाग ने कहा है कि यदि मनुष्य और जंगल के बीच सह-अस्तित्व बना रहे, तो यह प्राकृतिक संतुलन लंबे समय तक कायम रहेगा. बंगाल वन विभाग के कैमरे सक्रिय हैं. वन्यजीवों की निगरानी कर रहे हैं, वहीं झारखंड सीमा पर घाटशिला रेंज के जंगलों में लगे कैमरों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है. वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग की अपील की है.

वन विभाग की अपील

पारिस्थितिकी संतुलन बनाये रखने के लिए मनुष्य और जंगल का सह-अस्तित्व जरूरी

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Published by: Atul pathak

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