चाकुलिया: पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया, बहरागोड़ा, गुड़ाबांदा और धालभूमगढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक का मुद्दा गुरुवार को संसद में उठा. सांसद विद्युत वरण महतो ने इन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष से उत्पन्न गंभीर स्थिति की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कराया.
सांसद ने बताया कि पिछले एक दशक में जंगली हाथियों के हमलों में 47 लोगों की मौत हो चुकी है. इस दौरान कई ग्रामीण घायल भी हुए हैं. वर्ष 2026 में भी हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है. उन्होंने कहा कि हाथियों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा है. अब हाथी दिन के समय भी गांवों में प्रवेश कर रहे हैं. इससे ग्रामीणों की जान को खतरा बढ़ने के साथ किसानों की फसल, मकान और अन्य संपत्ति को भी नुकसान पहुंच रहा है.
भय के माहौल में जी रहे ग्रामीण
सांसद ने कहा कि लगातार हो रही घटनाओं के कारण प्रभावित इलाकों के ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन गुजार रहे हैं. हाथियों को गांवों में आने से रोकने के लिए अपनाये जा रहे पारंपरिक उपाय भी पर्याप्त प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं.
उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से प्रभावित क्षेत्रों का विशेषज्ञों की केंद्रीय टीम से सर्वेक्षण कराने का आग्रह किया.
स्थायी हाथी गलियारा बनाने की मांग
सांसद ने हाथियों की आवाजाही का वैज्ञानिक अध्ययन कराने और उसके आधार पर स्थायी हाथी गलियारों के निर्माण की मांग की. उन्होंने हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने के लिए प्रभावी हाथी-रोधी अवरोध तैयार करने की भी मांग रखी.
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने और हाथियों के हमले में प्रभावित परिवारों को त्वरित एवं पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराने का आग्रह किया.
सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मानव-हाथी संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने तथा आवश्यक केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की.
