गालूडीह. गालूडीह के कुड़मी बहुल गांवों में बुधवार को पारंपरिक बांदना पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. शाम में ग्रामीणों ने गोहाल पूजा की. इस दौरान गाय और बैलों को सजाया गया. पशुओं के सिंगों पर तेल लगाया गया. महिलाओं ने सूप में दीपक और चावल लेकर गौ चुमावन किया. इसके बाद पशुओं को स्पर्श कर आशीर्वाद लिया. बैलों के सिंगों में धान की बालियों का माला पहनाया गया. बड़ाखुर्शी, पायरागुड़ी, दारीसाई, कुलियाना, पुतरू, आमचुड़िया, छोटाखुर्शी, खड़ियाडीह, जोड़सा, राजाबासा और धमकबेड़ा सहित आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने गोरया देवता की पूजा की. लकड़ी से बने गोरया देवता की गोहाल में विधानपूर्वक स्थापना की गयी. फिर विशेष पूजा की गयी. इस दौरान महिलाएं उपवास रखकर धान के पौधों से मुकुट बनाकर सिर पर धारण करती हैं. गाय-बैल की सजावट करती हैं. महिलाएं चावल के घोल से अल्पना (रंगोली) बनाकर गोहाल से घर तक सजाती हैं. इससे होकर पूजन के बाद पशु बाहर निकलते हैं. हल-कुदाल जैसे कृषि उपकरणों की भी पूजा की गयी. गुरुवार को कई गांवों में गोरू खूंटाव (पशु बांधने और नचाने का आयोजन) किया जायेगा. इससे पहले पशुओं को नहलाकर सजाया जायेगा. महिलाएं पशुओं की पूजा कर आशीर्वाद लेंगी. ताकतवर बैलों को खूंटे में बांधकर ढोल-ढमाका के बीच नचाया जायेगा.
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