कभी क्लब घर, कभी तिरपाल टांगकर तो कभी झोपड़ी में रहने को विवश गरीब

चाकुलिया के सालबोनी गांव में तपन राणा का परिवार तिरपाल और झोपड़ी में रहने को मजबूर है। खबर के बाद प्रशासन ने पक्का आवास दिलाने की प्रक्रिया शुरू की है।

प्रतिनिधि, चाकुलिया गरीबों और बेघरों को पक्का मकान देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा पीएम आवास, अबुआ आवास, जनमन और दीनदयाल आवास जैसी कई योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके बावजूद चाकुलिया प्रखंड की कालियाम पंचायत अंतर्गत सालबोनी गांव निवासी तपन राणा का परिवार आज भी एक-एक आशियाने के लिए तरस रहा है.

लगभग दो वर्ष पूर्व बरसात में तपन राणा का मिट्टी का घर गिर गया था. इसके बाद वे पत्नी और दो बच्चों के साथ गोहालडांगरा स्थित एक क्लब भवन में शरण लेने को विवश हुए. करीब 6 महीने बाद मकर संक्रांति के त्योहार के समय ग्रामीणों ने उन्हें क्लब खाली करने का फरमान सुना दिया. बेबस दंपती अपना सामान सिर पर लादकर वापस अपने टूटे घर के पास पहुंचे. इसके बाद मुखिया दासो हेंब्रम द्वारा दिये गये तिरपाल और एक छोटी सी फूस की झोपड़ी बनाकर किसी तरह जीवन गुजर-बसर कर रहे हैं. तपन और उनकी पत्नी ने बताया कि झोपड़ी में अक्सर जहरीले सांप घुस आते हैं, जिससे पूरे परिवार को डर के साये में रातें जागकर बितानी पड़ती हैं. मामले में मुखिया दासो हेंब्रम ने बताया कि प्रभात खबर में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है. पंचायत सचिव ने मोटगोदा गांव के संजीव सबर के साथ-साथ तपन राणा को भी जल्द आवास दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है.


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By Prabhat khabar news desk

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