धालभूमगढ़.
धालभूमगढ़ प्रखंड के चतरो निवासी किसान रतन महतो ने इस साल खेतों में न हल चलाया, ना बीज बोया, फिर भी धान की फसल लहलहा रही है. यह देख किसान को खुशी का ठिकाना नहीं है. दरअसल, उन्होंने पिछले साल धान की खेती के बाद ठूंठ (कटना के बाद जड़) को वैसे ही छोड़ दिया था. पूर्व लोकपाल डॉ रतन महतो ने बताया कि पिछले वर्ष किसान रतन ने उच्च फलनशील (हाई ब्रीड) धान के बीज मद्रास से मंगवाया था. उससे काफी अच्छी पैदावार हुई. धान काटने के बाद अपने कार्यों में व्यस्त हो गये. इस बीच रेल रोको आंदोलन के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा. इस वर्ष खेती नहीं कर पाये. जेल से छूटे, तो ग्रामीणों ने बताया कि उनके खेत में धान की फसल लहलहा रही है. काफी अच्छी पैदावार हुई है.बिना मेहनत 10 क्विंटल धान उत्पादन होगा
उन्होंने कहा कि इस साल खरबंदा मौजा स्थित लगभग दो बीघा खेत में उन्होंने न जुताई की, न बुवाई. धान की फसल लहलहा रही है. उन्होंने देखा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने बताया कि बीते वर्ष धान काटने के बाद पौधों के ठूंठ खेतों में छोड़ दिया था. संभवत इसी कारण फिर से धान के पौधे हो गये हैं. इस साल लगभग 10 क्विंटल धान की प्राप्ति होगी. कई किसानों ने बताया कि धान के कुछ हाइब्रिड बीज ऐसे होते हैं, जो एक बार फसल देने के बाद अगले वर्ष पुनः उनमें धान की बालियां उग आती हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
