East Singhbhum News : साजिशन आदिवासियों और कुड़मी को लड़ाया जा रहा : प्रभाकर तिर्की

झारखंड आंदोलनकारियों की बैठक में एकता, सम्मान और रोजगार पर चर्चा

घाटशिला.

घाटशिला प्रखंड के फूलडुंगरी स्थित बाबा तिलका मांझी क्लब में शनिवार को झारखंड आंदोलनकारियों की बैठक प्रो श्याम मुर्मू की अध्यक्षता में हुई. यहां मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी प्रभाकर तिर्की व विशिष्ट अतिथि ललित महतो, लालटू महतो, रतन गिरी, अजीत तिर्की समेत झारखंड के विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि उपस्थित रहे. प्रभाकर तिर्की ने कहा कि झारखंड की नींव रखने में आंदोलनकारियों का अहम योगदान रहा. राज्य को संवारने व विकसित करने की जिम्मेवारी आंदोलनकारियों की है. आदिवासी-मूलवासी तथा हर समाज की एकता से झारखंड बना. आज आदिवासी- मूलवासी और कुड़मी को आपस में लड़ाने का काम किया जा रहा है, जो चिंताजनक है.

इसे रोकने के लिए समाज को सजग रहना होगा. झारखंड आंदोलनकारियों को नयी पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराना होगा. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की सम्मान राशि (3500 रुपये) और मंईयां योजना (2500 रुपये) से झारखंड के लोगों का कार्य नहीं चलेगा. राज्य में लगने वाले उद्योगों में 75% स्थानीय आरक्षण के नियम को धरातल पर लागू करना जरूरी है, ताकि युवाओं को रोजगार मिले और पलायन रुके.

राज्यभर में चलेगा जागरुकता अभियान

श्री तिर्की ने कहा कि वर्ष 2026 में झारखंड आंदोलनकारी जागरुकता अभियान राज्यभर में चलाया जायेगा. झारखंड में रहने वाले आदिवासी-मूलवासी को रोजगार मिले, दूसरे राज्य में पलायन न करना पड़े. झारखंड आंदोलनकारी आयोग का विस्तार किया जाये. आवेदनों का निष्पादन किया जाये.

सीएम से मिलकर सभी मुद्दों को रखेगा प्रतिनिधिमंडल

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सभी मुद्दों से अवगत कराने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल मिलकर ज्ञापन सौंपेगा. इसमें झारखंड में आदिवासी तथा कुड़मी को लड़ाने का षड्यंत्र बंद हो, कोई भी मीडिया चैनल इस मामले को अगर प्रमुखता से दिखता है तो सरकार व प्रशासनिक कार्रवाई हो. झारखंडी एकता बरकरार रहे. झारखंड में किसी कंपनी के लिए जमीन देती है, तो सरकार की इच्छा शक्ति होने चाहिए कि यहां के लोगों को रोजगार कैसे मिले. कई दशक लड़ने के बाद झारखंड राज्य का गठन हुआ. झारखंड को पूंजीपतियों और बिचौलिया से दूर रहने की आवश्यकता है.

आंदोलनकारी आयोग के विस्तार पर जोर

बैठक में आंदोलनकारी आयोग के विस्तार, लंबित आवेदनों के निपटान और बाहरी प्रभावों से झारखंड की एकता को बचाये रखने पर जोर दिया गया. मौके पर झारखंड आंदोलनकारी ललित महतो, लालटू महतो, रतन गिरि, अजीत तिर्की, सुप्रिती मुर्मू सहित कई नेताओं ने अपने विचार रखे. संचालन आदित्य प्रधान ने किया. मौके पर संजय बेहरा, तरुण मुखर्जी, मिथिला सिंह, सुधा रानी बेसरा, बीरधन सोरेन, देवन बॉस समेत पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, पलामू, खूंटी, तमाड़ समेत कई क्षेत्रों के आंदोलनकारी प्रतिनिधि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Akash

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >