East Singhbhum News : झारखंड में साजिशन बांग्ला भाषा को हाशिये पर धकेला गया : तापस

मातृभाषा के सम्मान और अधिकारों को लेकर उठी आवाज

घाटशिला. झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति ने रविवार को घाटशिला के जेसी हाई स्कूल स्थित आशा ऑडिटोरियम में आनंद सम्मेलन आयोजित किया. यहां झारखंड में बांग्ला भाषा और संस्कृति के संरक्षण, प्रसार व सरकारी विद्यालयों में बांग्ला शिक्षण की पुनर्स्थापना पर चर्चा हुई. समिति के केंद्रीय महासचिव राजेश राय ने संचालन, जबकि अध्यक्षता समिति के घाटशिला अनुमंडल अध्यक्ष साधुचरण पाल ने की. सम्मेलन में देवी शंकर दत्ता, तापस चटर्जी, करुणामय मंडल, अमियो ओझा, जेके बोस समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे. तापस चटर्जी ने कहा कि झारखंड बनने के बाद एक साजिश के तहत बांग्ला भाषा और समाज को हाशिए पर धकेला जा रहा है. उन्होंने चिंता जतायी कि झारखंड के कई स्कूलों में बांग्ला किताबें और शिक्षण बंद कर दिये गये हैं. इससे नयी पीढ़ी अपनी मातृभाषा से दूर होती जा रही है. आने वाले चुनाव में बांग्ला भाषा के हित में जो काम करेगा, उसी का समर्थन किया जायेगा. अविभाजित बिहार के समय पूर्वी सिंहभूम व घाटशिला के आस पास में बांग्ला भाषा का पढ़ाई होती थी. राज्य के गठन के 25 वर्ष बाद बंगला भाषा की पढ़ाई बंद हो गयी. वर्तमान में केंद्र व राज्य सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. झारखंड बंगला भाषा उन्नयन समिति 42 अपूर पाठशाला चलाकर बांग्ला भाषा को बचा रही है.

भाषा व संस्कृति बचाने के लिए आगे आयें : काबू दत्ता

काबू दत्ता ने कहा कि बांग्ला समाज हमेशा से बुद्धिजीवी रहा है. इस कारण उन्हें सत्ता से दूर रखा जा रहा है. अब समय आ गया है कि सभी बांग्लाभाषी समुदाय एकजुट होकर अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आयें. करुणामय मंडल ने मातृभाषा की गरिमा और पहचान की रक्षा की अपील की. मातृभाषा के प्रति सम्मान रखना हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है.

एकजुटता से आवाज उठाने का निर्णय

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि झारखंड में बांग्ला भाषा-संस्कृति की सुरक्षा और संवर्धन के लिए बांग्लाभाषी समुदाय एकजुट रहकर अपनी आवाज बुलंद करेगा. मौके पर मनोरंजन बक्सी, कंचन कर, शिल्पी सरकार, संदीप राय चौधरी, असित चक्रवर्ती, सुभाष गोराई, असित भट्टाचार्य, महेंद्र मंडल, विकास भट्टाचार्य, राजू चौधरी, नीलू दत्ता, शिवाजी चटर्जी, सुबोध गोराई, रवींद्रनाथ विश्वास, शिवशंकर पाल, उत्तम सिंहा, संपा सरकार, शिखा मुखर्जी समेत काफी संख्या में बांग्ला समाज के पुरुष, महिलाएं और बच्चे उपस्थित थे.

बच्चों ने नाटक से मातृभाषा का महत्व बताया

मौके पर चाकुलिया, बहरागोड़ा, पोटका, मुसाबनी, जमशेदपुर और चाईबासा समेत विभिन्न प्रखंडों से बांग्ला भाषी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए. सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत बच्चों ने अपूर पाठशाला की प्रस्तुति दी. नाटक के माध्यम से बच्चों ने मातृभाषा के महत्व, उसके प्रति जागरूकता और अधिकारों के लिए संघर्ष और अपूर पाठशाला के बारे में विस्तार से बताया. स्थानीय कलाकारों ने बांग्ला गीत में नृत्य प्रस्तुत कर सभा में सांस्कृतिक रंग भर दिया.

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Author: ATUL PATHAK

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