गालूडीह. मोंथा चक्रवातीय तूफान से झारखंड में लगातार बारिश हो रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. मंगलवार दोपहर से शुरू हुई बारिश बुधवार तक रुक-रुककर जारी रही. दारीसाई क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के अनुसार, अब तक 33.06 मिमी बारिश दर्ज की गयी है. बारिश से खेतों में पानी भर गया है. कटे हुए धान भीग गये हैं. किसानों को मजबूरन भीगे हुए धान को खेत की मेढ़ पर रखकर सूखाना पड़ रहा है. खेतों में खड़ी फसल गिरने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ा है. बड़ाकुर्शी के सुंदरपुर टोला निवासी किसान जोगेन सिंह और उनकी पत्नी अनिता सिंह ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ जमीन में धान की खेती की थी, लेकिन इस बारिश से पूरी फसल प्रभावित हो गयी है. उन्होंने इसे “आफत की बारिश” कहा, क्योंकि अब फसलों को पानी की आवश्यकता नहीं थी और अधिक नमी से नुकसान बढ़ गया है. कुल मिलाकर, यह असमय बारिश किसानों के लिए बड़ी समस्या बनकर आई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है.
‘मोंथा’ से सब्जी की खेती प्रभावित, किसान चिंतित
बहरागोड़ा. बहरागोड़ा प्रखंड की पाथरी पंचायत के दर्जनों गांव के किसानों ने सब्जी की खेती की है. मोंथा तूफान से सब्जी की खेती को नुकसान पहुंच रहा है. इससे किसान चिंतित हैं. किसानों ने सब्जी की खेती को बीमा के दायरे में लाने की मांग की है. किसानों ने बताया कि हमलोगों का मुख्य स्रोत सब्जी की खेती है. यहां के अधिकतर किसान साल में दो बार सब्जी उगाते हैं. वर्ष 2025 सब्जी की खेती के लिए निराशाजनक रहा. इस बार उम्मीद से ज्यादा बारिश हुई है. इस कारण किसानों को सब्जी की खेती में इस बार आमदनी काफी कम हुई है. बामडोल में फूलगोभी, बंधागोभी, बैगन, मिर्च, टमाटर के पौधे तैयार हो गये हैं. अगर अधिक बारिश हुई, तो पौधे बर्बाद हो जायेंगे. इसकी चिंता किसानों को सता रही है. प्रभारी कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि अधिक बारिश होने से सब्जी की खेती पर असर पड़ सकता है. सब्जी की खेती बीमा के दायरे में नहीं है. किसानों की समस्या से जिला में अवगत कराया गया है.बारिश से ज्यादा हवा से होगा नुकसान : किसान
डुमरिया. डुमरिया प्रखंड में मोंथा चक्रवात के प्रभाव से किसानों की धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. मंगलवार की दोपहर से बारिश व हवा शुरु हो गयी जो रुक-रुक कर दिन भर होती रही. वहीं, बुधवार को दिन भर बादल छाये रहे. रुक-रुक कर बारिश हुई. इससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा. किसानों का कहना है कि बारिश से ज्यादा हवा से नुकसान होगा. बारिश से जहां पके हुए धान की बाली भारी हो जायेगी और हल्की हवा से वह गिर जायेगी. जमीन में अगर पानी जम जाये और धान गिर जाए, तो वे जल्द अंकुरित हो जाते हैं. इससे धान सड़ने लगता है. इससे धान की कटाई में काफी परेशानी होती हैं. अगर गुरुवार को धूप निकलता है, तो क्षति कम होगी. वरना किसानों को भारी नुकसान का सामना करना होगा. बताया कि कृषि विभाग द्वारा मोंथा को लेकर व्यापक प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण सुदूर गांवों के किसान इससे अनभिज्ञ थे. वे अपने धान की कटाई में लगे हुए थे, जो अभी जमीन में पड़ा हुआ है. इससे किसानों की काफी क्षति होगी. धान को मेढ़ में सुखाकर कर ही खलियान लाया जा सकते हैं. बारिश अगर ज्यादा होती है तो, कटे हुए धान को बर्बाद होने से कोई रोक नहीं सकता.बरसोल : बारिश से धान की फसल गिरी, किसान चिंतित
बरसोल. बरसोल में बंगाल की खाड़ी में उठे मोंथा चक्रवात का असर दिखने लगा है. मोंथा के कारण हो रही हल्की बारिश से किसानों के माथे पर चिंता दिखायी दे रही है. पांचरुलिया, पारुलिया, जयपूरा, कुमारडूबी, खंडामौदा आदि जगहों पर धान की फसल जमीन पर गिर गयी है. कई जगहों पर धान कटनी शुरू हो चुकी थी. धान कटनी के बाद किसानों ने अपनी फसल को खेतों में रखा था. वहीं कई किसान धान की फसल को खेतों से उठाकर खलिहान पहुंचा चुके हैं. बारिश होने पर दोनों जगह रखे धान को नुकसान पहुंचने की संभावना जतायी गयी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
