गालूडीह. बंगाल की खाड़ी में उठे शक्ति शाली चक्रवाती तूफान ””””””””मोंथा”””””””” अब झारखंड तक पहुंच चुका है. मंगलवार शाम घाटशिला में मौसम में बदलाव देखने को मिला. जहां दोपहर को जोरदार बारिश हुई. मौसम विभाग द्वारा बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट भी जारी किया गया है, जिससे किसानों चिंता बढ़ गयी हैं. कई जगहों पर धान की कटाई शुरू हो गयी है. तैयार धान की बालियां जमीन के संपर्क में आने से अंकुरित होकर चौपट हो जायेगी. वहीं कई खेतों में धान की फसलें बारिश से झुक गयी है. ऐसे में खेतों में जमा पानी से फसल खराब हो जायेगी.
किसानों की बढ़ी चिंता
चक्रवाती तूफान ””””””””मोंथा”””””””” का पूर्वानुमान क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है. बे मौसम बारिश की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पर धान की कटाई जोरों पर है. क्षेत्र के किसान सबसे अधिक चिंतित हैं, क्योंकि अगर तैयार फसल बारिश की चपेट में आती है तो उन्हें भारी नुकसान होगा है. धान की फसल पूरी तरह भीगने से गुणवत्ता और उपज दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा. वहीं, कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि वे अपनी फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें और आवश्यक सुरक्षा अपनायें.क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक:
अगर बारिश होती रही, तो सबसे ज्यादा धान की फसल को नुकसान होगा. अभी धान के कटनी का समय है. बारिश से धान की बाली गीली हो जायेगी. यदि कटे धान की बाली भींग जाती है, तो वो इससे फूल जायेगी. जमीन पर गिरकर मिट्टी के संपर्क में आने पर अंकुरित होने की संभावना है. धान खाने लायक रहेगा, लेकिन बीज के लायक नहीं रहेगा.–
डॉ जयंत कुमार लाल
, वरीय वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, दारीसाईडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
